दिवाली पर दीये जलाने की सही विधि 2026: सजावट, तेल और दीयों की गिनती
दिवाली पर दीये जलाने की सही विधि 2026 जानें: दीया कैसे सजाएं, कितने दीये रखें, सरसों तेल या घी चुनें और दीये बुझने से कैसे बचाएं।
दीयों का महत्व और तैयारी
दिवाली की शाम दीयों की रोशनी से घर जगमगाता है। लक्ष्मी पूजन 8 नवंबर 2026, रविवार को है, इसलिए दीये जलाने की तैयारी उससे कुछ दिन पहले शुरू कर देना अच्छा रहता है। दीया जलाना प्रकाश और अच्छाई के स्वागत का प्रतीक माना जाता है।
सबसे पहले मिट्टी के नए दीये खरीद लें और उन्हें पानी से धोकर अच्छी तरह सुखा लें। कुछ परिवार दीयों पर हल्दी या कुमकुम का टीका लगाते हैं। यह छोटा सा काम भी त्योहार के माहौल को खास बना देता है।
परिवार के सभी सदस्य मिलकर दीये सजाएं तो काम भी आसान होता है और त्योहार का आनंद भी बढ़ता है।
बच्चों को दीये रंगने या रंगोली के आसपास दीये रखने में शामिल करना अच्छा अनुभव बन सकता है। पूजा के बाद बचे हुए दीये सुरक्षित रखें, ताकि अगली बार काम आ सकें।
दीया कैसे सजाएं
दीयों को कतार में सजाने की परंपरा सबसे आम है। कई घर दरवाजे की दहलीज, आंगन, छत की मुंडेर, तुलसी के पास और खिड़कियों पर दीये रखते हैं। दीये इस तरह रखें कि आने-जाने वाले रास्ते में न आएं और उनकी लौ के पास कपड़े या पर्दे न हों।
दीयों के नीचे थाली या प्लेट रख लेने से तेल फैलने का डर कम रहता है। रंगोली के पास दीये रखें तो सजावट और भी सुंदर लगती है। सजावट में बिजली की लड़ियों के साथ मिट्टी के दीयों का मेल भी बहुत से घरों में देखा जाता है।
दीये सजाते समय उन्हें समतल जगह पर रखें, ताकि तेल एक तरफ न झुके। ऊंची जगह पर रखे दीयों को गिरने से बचाने के लिए मजबूत स्टैंड का इस्तेमाल करें।
कितने दीये जलाएं
दीयों की गिनती को लेकर कोई एक नियम नहीं है। फिर भी कई परिवारों में , 2], 5] या 08 दीये जलाने की परंपरा है। माना जाता है कि विषम संख्या में दीये रखना शुभ होता है, पर यह परंपरा पर आधारित मान्यता है।
दीये कितने रखने हैं, यह अपनी जगह और सुविधा के हिसाब से तय करें। कम दीये भी श्रद्धा से जलाए जाएं तो पूजा का भाव पूरा माना जाता है। गिनती से ज्यादा यह ध्यान रखें कि हर दीया ठीक से जले और सुरक्षित रहे।
सरसों का तेल या शुद्ध घी
उत्तर भारत के कई घरों में दीयों में सरसों का तेल इस्तेमाल होता है। शुद्ध देसी घी का दीया भी शुभ माना जाता है और पूजा में इसे विशेष स्थान दिया जाता है। आप परिवार की परंपरा और बजट को देखकर इनमें से कोई एक चुन सकते हैं।
तेल या घी खरीदते समय भरोसेमंद दुकान से लें, ताकि शुद्धता बनी रहे। रुई की बाती ज्यादा मोटी न हो और दीये में पर्याप्त तेल डाला जाए। बाती को थोड़ा ऊपर खींचकर रखने से लौ साफ और स्थिर रहती है।
दिशा की परंपरा
कई घरों में मुख्य दरवाजे पर दीया रखने की परंपरा है, ताकि घर में रोशनी का स्वागत हो। माना जाता है कि पूर्व या उत्तर दिशा की ओर दीया रखना शुभ होता है। यह मान्यता अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में थोड़ी बदल जाती है।
अगर आपके घर में दिशा को लेकर कोई खास परंपरा चली आ रही है, तो उसी का पालन करें। किसी विशेष वास्तु या दिशा संबंधी सलाह के लिए किसी जानकार पंडित या वास्तु विशेषज्ञ से बात करना सबसे अच्छा रहता है।
दीये बुझ न जाएं इसके तरीके
तेज हवा दीयों की लौ बुझा सकती है, इसलिए उन्हें ऐसी जगह रखें जहां हवा का झोंका सीधा न पहुंचे। दीये को एक-दूसरे से थोड़ी दूरी पर रखें, ताकि एक की हवा से दूसरा न बुझे। बाहर रखे दीयों को कांच के छोटे घेरे से ढकना भी एक उपाय है।
बीच-बीच में दीयों में तेल या घी भरते रहें। बाती गीली या टेढ़ी हो तो उसे ठीक कर लें। दीये जलते समय कभी उन्हें अकेला न छोड़ें, खासकर जब घर में बच्चे या बुजुर्ग हों। कागज़, पर्दे और ज्वलनशील चीज़ों को लौ से दूर रखना सबसे ज़रूरी सुरक्षा है।
पूजा के बाद दीयों की देखभाल
पूजा और आरती के बाद दीयों को धीरे-धीरे ठंडा होने दें। जलते हुए दीये को हाथ से उठाने के बजाय उसे अपनी जगह पर ही बुझने दें, ताकि गर्म तेल से हाथ न जले। तेल ज़्यादा फैला हो तो उसे सावधानी से पोंछ लें।
ठंडे होने के बाद दीयों पर लगी कालिख और तेल को सूखे कपड़े या मुलायम ब्रश से हल्के हाथ से साफ करें।
पानी में भिगोने से मिट्टी कमजोर हो सकती है, इसलिए गीले कपड़े का इस्तेमाल कम करें। जो दीये टूटे या दरारों वाले हों, उन्हें फिर से न जलाएं।
साफ और सूखे दीयों को एक डिब्बे में रखें और उसे नमी से दूर किसी सूखी जगह पर संभालें। अगले साल के लिए रखे दीये उसी डिब्बे में रहें तो गिनती और सामान दोनों संभालना आसान होता है। बच्चों की पहुंच से दूर रखना भी अच्छा रहता है।
पूजा स्थान पर दीयों की व्यवस्था
पूजा की चौकी के सामने दीयों को इस तरह रखें कि मूर्ति या तस्वीर साफ दिखे। दीयों की लौ मूर्ति की ओर न झुके, इस बात का ध्यान रखें।
आरती के समय के लिए एक अलग दीया या बड़ा दीपक तैयार रखें। इससे बार-बार छोटे दीयों में तेल भरने की जरूरत कम पड़ती है।
दीयों के बीच थोड़ी जगह रखें, ताकि उनकी गर्मी और लौ एक-दूसरे को न छुएं। पूजा की थाली के पास जलता दीया हो तो उसे हिलने वाले कपड़ों से दूर रखें।
मिट्टी के दीयों के साथ पर्यावरण का ध्यान
मिट्टी के दीये प्राकृतिक होते हैं और उन्हें आसानी से संभाला जा सकता है। कई परिवार इन्हें चुनते हैं, क्योंकि यह परंपरा से जुड़े होते हैं और सजावट में सादगी लाते हैं।
प्लास्टिक या धातु के दीयों की जगह मिट्टी के दीये चुनना भी एक सोच है। जो परिवार इसे अपनाता है, वह त्योहार को अपने ढंग से सार्थक बनाता है।
दीयों की संख्या तय करते समय यह सोचें कि उन्हें जलाने के बाद संभालना कितना आसान होगा। बहुत ज़्यादा दीये रखने से तेल और समय दोनों अधिक लगते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: दिवाली पर कितने दीये जलाना सही है?
उत्तर: इसका कोई एक तय नियम नहीं है। कई परिवार त, 2], 5व या 08 दीये जलाते हैं, जिसे परंपरा के रूप में माना जाता है। आप अपनी जगह और सुविधा के अनुसार दीये चुन सकते हैं।
प्रश्न: सरसों के तेल और घी में से क्या बेहतर है?
उत्तर: दोनों ही पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होते हैं। कई उत्तर भारतीय घरों में सरसों का तेल चलता है, जबकि शुद्ध घी को शुभ माना जाता है। अपनी परंपरा, बजट और शुद्धता को ध्यान में रखकर चुनें।
प्रश्न: दीया बार-बार बुझ जाए तो क्या करें?
उत्तर: बाती की मोटाई, तेल की मात्रा और हवा के झोंके को जांचें। दीये को किसी छायादार या सुरक्षित जगह पर रखें और बीच-बीच में तेल भरते रहें। यह व्यावहारिक तरीका है, इसकी कोई गारंटी नहीं है कि इससे कोई विशेष फल मिलेगा।
प्रश्न: दीये जलाते समय सबसे बड़ी सावधानी क्या है?
उत्तर: दीयों को ज्वलनशील चीज़ों से दूर रखें और कभी भी जलते दीये को अकेला न छोड़ें। बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें। सुरक्षा ही सबसे ज़रूरी बात है।
नोट: धार्मिक मान्यताएं परंपरा पर आधारित हैं। मुहूर्त और पूजा विधि के लिए अपना स्थानीय पंचांग और
योग्य पंडित से सलाह लें।