Ghaziabad’s Mystery Temple: जहाँ रावण ने चढ़ाया था अपना सिर! जानें इस चमत्कारी कुएं का रहस्य

1 min read

Ghaziabad के हृदय में स्थित Dudheshwar Mahadev Temple न केवल एक प्राचीन मंदिर है, बल्कि यह रहस्यों और पौराणिक कथाओं का एक अद्भुत संगम भी है। यह मंदिर त्रेता युग से जुड़ा हुआ माना जाता है और इसे ‘स्वयंभू’ शिव मंदिर के रूप में पूजा जाता है।

रावण और दुधेश्वर महादेव का संबंध

पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण के पिता ऋषि विश्रवा ने इसी पवित्र स्थान पर कठिन तपस्या की थी। इतना ही नहीं, दशानन रावण ने स्वयं यहाँ महादेव की आराधना की थी। कहा जाता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रावण ने अपने पहले सिर की आहुति इसी स्थान पर दी थी। आज भी भक्त इस स्थान पर उस दिव्य ऊर्जा को महसूस करते हैं।

चमत्कारी कुआं: जो बदलता है अपना रंग

इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण यहाँ स्थित एक प्राचीन कुआं है। स्थानीय लोगों और भक्तों का मानना है कि इस कुएं का पानी समय के साथ अपना रंग और स्वाद बदलता रहता है। कभी यह दूध जैसा सफेद दिखता है, तो कभी इसका स्वाद गंगाजल जैसा अमृत तुल्य हो जाता है। मान्यता है कि इस जल में औषधीय गुण भी मौजूद हैं, जो कई बीमारियों को दूर करने में सहायक होते हैं।

त्रेता युग की धरोहर

5,000 साल पुराने इस शिवलिंग की खोज भी एक चमत्कारिक घटना थी। कहा जाता है कि एक गाय यहाँ अपने आप दूध अर्पित करती थी, और खुदाई करने पर यह दिव्य शिवलिंग प्रकट हुआ। इसी कारण इसका नाम ‘दुधेश्वर’ पड़ा।

आज की प्रासंगिकता: सूर्य ग्रहण और महाशिवरात्रि

आने वाले सूर्य ग्रहण और महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर इस मंदिर के दर्शन करना विशेष फलदायी माना जाता है। यदि आप भी महादेव के अनन्य भक्त हैं और पौराणिक रहस्यों में रुचि रखते हैं, तो गाजियाबाद का यह दुधेश्वर महादेव मंदिर आपकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए।

Conclusion:
क्या आपने कभी ऐसे मंदिर के दर्शन किए हैं जहाँ इतिहास और रहस्य एक साथ चलते हैं? कमेंट्स में जरूर बताएं और इस जानकारी को अपने प्रियजनों के साथ शेयर करें!