कृष्ण जन्माष्टमी 2026 तारीख और निशिता काल पूजा शुभ मुहूर्त
हर साल भक्तों के मन में एक सवाल जरूर आता है — “जन्माष्टमी की सही तारीख और निशिता काल पूजा का समय क्या है?” चूंकि भगवान कृष्ण का जन्म रात के ठीक बारह बजे हुआ था, इसलिए सही समय पर पूजा करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
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अष्टमी तिथि का समय
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि जिस दिन रोहिणी नक्षत्र के साथ आधी रात को पड़ती है, वह दिन जन्माष्टमी के लिए सबसे शुभ माना जाता है। तिथि प्रारंभ व समाप्ति का सटीक समय हर शहर के हिसाब से अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग जरूर देखें।
निशिता काल पूजा का शुभ मुहूर्त
निशिता काल वह समय है जब रात सबसे गहरी होती है, आमतौर पर यह रात 11:30 बजे से लेकर 12:30 बजे के बीच होता है। यही वह पल है जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ माना जाता है, इसलिए इसी समय पूजा और झूला झुलाने की परंपरा है।
स्मार्त व वैष्णव संप्रदाय का अंतर
स्मार्त परंपरा में गृहस्थ लोग अष्टमी तिथि के अनुसार व्रत रखते हैं, जबकि वैष्णव संप्रदाय (मंदिर व साधु-संत) उदया तिथि के आधार पर एक दिन बाद व्रत रखते हैं। इसलिए दोनों परंपराओं में तारीख अलग हो सकती है।
पूजा से पहले तैयारी
- घर व मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें
- झूले को फूलों व मोरपंख से सजाएं
- बाल गोपाल के लिए नए वस्त्र व आभूषण तैयार रखें
- पूजा सामग्री जैसे तुलसी, माखन, मिश्री पहले से इकट्ठा करें
व्रत व उपवास का नियम
भक्त सुबह संकल्प लेकर पूरे दिन उपवास रखते हैं और निशिता काल की पूजा के बाद ही फलाहार या भोजन ग्रहण करते हैं। कुछ भक्त निर्जला व्रत भी रखते हैं, जबकि अधिकतर फलाहारी व्रत का पालन करते हैं।
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सही मुहूर्त में पूजा करने से भगवान कृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख–समृद्धि बनी रहती है।
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FAQs
निशिता काल पूजा किस समय होती है?
आमतौर पर रात 11:30 बजे से 12:30 बजे के बीच, अपने शहर के सटीक समय के लिए पंचांग जांचें।
स्मार्त और वैष्णव जन्माष्टमी अलग दिन क्यों मनाते हैं?
दोनों परंपराओं में तिथि गणना का तरीका अलग होने से एक दिन का अंतर आ सकता है।
क्या दिन में भी पूजा की जा सकती है?
दिन में सामान्य पूजा हो सकती है, लेकिन मुख्य जन्मोत्सव पूजा निशिता काल में ही की जाती है।





