परिवर्तिनी एकादशी व्रत नियम 2026: क्या खाएं, क्या न खाएं और पारण का सही समय

व्रत रखना जितना ज़रूरी है, उसे सही नियमों के साथ रखना उससे भी ज़रूरी है। शास्त्रों में कहा गया है कि नियम भंग होने पर व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता।

22 सितंबर 2026 को परिवर्तिनी एकादशी है। आइए जानते हैं इस व्रत के सभी नियम, आहार और पारण की पूरी जानकारी।

(मुहूर्त के लिए पढ़ें: परिवर्तिनी एकादशी 2026 तिथि और मुहूर्त)

व्रत के तीन प्रकार — अपनी क्षमता चुनें

प्रकारविवरणकिसके लिए
निर्जलाबिना अन्न-जल के 24 घंटेपूर्ण स्वस्थ, अनुभवी साधक
फलाहारफल, दूध, मेवा, जलअधिकांश गृहस्थ
सात्विक एकाहारदिन में एक बार बिना अन्न का भोजनबुज़ुर्ग, कामकाजी लोग

बच्चे, गर्भवती महिलाएं, मधुमेह या रक्तचाप के रोगी, और कोई भी दवा लेने वाला व्यक्ति निर्जला व्रत न करें। शास्त्र भी कहते हैं कि शरीर धर्म का पहला साधन है। पूजा, कथा और सात्विक आहार भी पूर्ण व्रत है।

व्रत में क्या खा सकते हैं

फल और सब्ज़ी – केला, सेब, पपीता, अनार, अंगूर, नाशपाती – लौकी, कद्दू, आलू, शकरकंद, अरबी – खीरा, टमाटर

अनाज के विकल्प – कुट्टू का आटा – सिंघाड़े का आटा – राजगिरा / रामदाना – साबूदाना – समा के चावल (व्रत वाले चावल)

दूध और मेवा – दूध, दही, छाछ, पनीर, मक्खन – बादाम, काजू, किशमिश, मखाना, नारियल

मसाले – सेंधा नमक (सामान्य नमक नहीं) – जीरा, काली मिर्च, हरी मिर्च, अदरक – धनिया पत्ती, नींबू

पेय – पानी, नारियल पानी, नींबू पानी, दूध – फलों का ताज़ा रस

व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए

चावल और चावल से बनी कोई भी चीज़ — सबसे बड़ा नियम ❌ गेहूं, दालें, बेसन, सूजी, मैदा ❌ प्याज और लहसुन ❌ मांस, मछली, अंडा ❌ मदिरा, तंबाकू ❌ सामान्य (आयोडाइज़्ड) नमक ❌ बासी या दूसरों का जूठा भोजन ❌ पैकेज्ड, तला-भुना जंक फूड

एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?

पौराणिक कथा के अनुसार महर्षि मेधा ने अपना शरीर त्यागकर पृथ्वी में समा गए थे, और उनका अंश एकादशी तिथि पर चावल और जौ के रूप में उत्पन्न हुआ। इसीलिए इस दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया।

आयुर्वेदिक दृष्टि से चावल जल-तत्व प्रधान है और एकादशी को चंद्रमा का प्रभाव मन पर अधिक होता है — चावल से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है जो साधना में बाधा मानी जाती है।

व्रत के दिन क्या न करें

  1. दिन में न सोएं — दिन की नींद व्रत का फल कम करती है
  2. बाल, नाखून, दाढ़ी न काटें
  3. तुलसी के पत्ते न तोड़ें — एक दिन पहले तोड़कर रखें
  4. किसी का अपमान, क्रोध, झूठ या निंदा न करें
  5. ब्रह्मचर्य का पालन करें
  6. कांसे के बर्तन में भोजन न करें
  7. चोरी, जुआ, हिंसा से दूर रहें
  8. किसी याचक को खाली हाथ न लौटाएं

व्रत के दिन का आदर्श रूटीन

समयकार्य
04:30 – 05:30स्नान, संकल्प
06:00 – 09:00विष्णु पूजा, अभिषेक, भोग
09:00 – 10:00व्रत कथा, विष्णु सहस्रनाम पाठ
दोपहरनाम जाप, दान, सेवा (सोना नहीं)
शामसंध्या दीपदान, आरती
रातभजन-कीर्तन, यथासंभव जागरण

पारण — व्रत खोलने की विधि और समय

पारण तिथि: 23 सितंबर 2026, बुधवार पारण समय: सुबह लगभग 06:10 से 08:35 के बीच (दिल्ली/उत्तर भारत के अनुसार — अपने शहर का पंचांग देखें)

पारण के नियम

  • पारण सूर्योदय के बाद और द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अनिवार्य है
  • हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) में पारण नहीं किया जाता
  • यदि पारण का समय चूक जाए, तो जितनी जल्दी हो सके सात्विक भोजन कर लें — व्रत तोड़ना पाप नहीं, पर देर करना अनुचित है
  • पहले तुलसी दल और गंगाजल ग्रहण करें, फिर भोजन
  • ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन कराकर ही स्वयं खाएं

पारण में क्या खाएं

पहला निवाला हल्का रखें — मूंग दाल की खिचड़ी, दही-चावल या सादा दलिया। एकदम भारी, तला या मसालेदार भोजन न करें। दिनभर पर्याप्त पानी पिएं।

FAQ

परिवर्तिनी एकादशी का पारण कब करें?

23 सितंबर 2026, बुधवार की सुबह लगभग 06:10 से 08:35 के बीच। समय अपने शहर के सूर्योदय अनुसार देखें।

क्या एकादशी व्रत में पानी पी सकते हैं?

हां। निर्जला व्रत स्वैच्छिक है। सामान्य व्रत में जल, दूध, फल और फलाहार पूरी तरह मान्य हैं।

एकादशी में सेंधा नमक ही क्यों?

सेंधा नमक अपरिष्कृत और प्राकृतिक माना जाता है, जबकि सामान्य नमक रासायनिक प्रक्रिया से गुज़रता है। व्रत में शुद्ध और अल्प-प्रसंस्कृत आहार का नियम है।

दवा लेनी हो तो क्या करें?

नियमित दवा अवश्य लें। शास्त्र स्वयं कहते हैं कि रोगी और असमर्थ व्यक्ति के लिए नियमों में छूट है। स्वास्थ्य से समझौता न करें।

व्रत के दिन काम पर जा सकते हैं?

हां। कर्तव्य निभाना भी धर्म है। बस मन में नाम स्मरण, संयमित वाणी और सात्विक आहार बनाए रखें।

अगर व्रत बीच में टूट जाए तो?

अनजाने में नियम भंग हो जाए तो घबराएं नहीं। भगवान विष्णु से क्षमा प्रार्थना करें, दीपक जलाकर नाम जाप करें और अगली एकादशी पर पुनः संकल्प लें।

लेखक

ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र लेखिका · 20 वर्ष का अनुभव

ज्योतिष, वैदिक कर्मकांड और स्वप्न-शास्त्र पर दो दशकों से लेखन कर रही हैं। दुर्गा सप्तशती, लाल किताब और नाड़ी ज्योतिष पर विशेष अध्ययन। पाठकों के प्रश्नों के आधार पर व्यावहारिक और शास्त्र-सम्मत मार्गदर्शन देती हैं।

  • योग्यता: ज्योतिष आचार्य, संस्कृत स्नातक
  • विशेषज्ञता: वैदिक ज्योतिष, लाल किताब, नाड़ी ज्योतिष, स्वप्न शास्त्र, व्रत एवं कर्मकांड