शिवलिंग पूजा के नियम: क्या चढ़ाएँ और क्या कभी न चढ़ाएँ

Short answer

शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, आक और भस्म अर्पित की जाती है। परंपरा में तुलसी दल, केतकी पुष्प, हल्दी, कुमकुम, शंख का जल और नारियल का जल वर्जित माने गए हैं। प्रत्येक निषेध के पीछे पुराणों में एक कथा मिलती है।

शिवलिंग पूजा सनातन परंपरा की सबसे सरल और सबसे व्यापक उपासना पद्धतियों में है। जल की एक धार और एक बेलपत्र — इतना ही पर्याप्त माना गया है। किंतु कुछ वस्तुएँ ऐसी हैं जिनका निषेध परंपरा में स्पष्ट रूप से बताया गया है।

शिवलिंग पर क्या अर्पित करें

  • जल — शीतल, पतली और अखंड धार में
  • दूध — कच्चा, बिना उबला
  • बेलपत्र — तीन पत्तों वाला, चिकनी सतह नीचे की ओर
  • धतूरा और आक — जो अन्य देवताओं को नहीं चढ़ते, शिव को प्रिय हैं
  • भस्म — शिव का प्रमुख प्रतीक
  • चंदन — सफेद चंदन, शीतलता का प्रतीक

क्या कभी न चढ़ाएँ

तुलसी दल

कथा के अनुसार तुलसी अपने पूर्व जन्म में वृंदा थीं, जिनके पति जालंधर का वध शिव ने किया था। इसी कारण तुलसी शिव पूजा में अर्पित नहीं की जाती। तुलसी विष्णु को प्रिय है।

केतकी का पुष्प

शिव पुराण की कथा में ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता का विवाद हुआ। ज्योतिर्लिंग का आदि-अंत खोजने के प्रसंग में केतकी ने असत्य साक्ष्य दिया, जिस पर शिव ने उसे अपनी पूजा से वंचित कर दिया।

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हल्दी और कुमकुम

हल्दी सौंदर्य और सौभाग्य से जुड़ी है तथा देवी पूजा में प्रयुक्त होती है। शिव वैरागी स्वरूप हैं, इसलिए इनका प्रयोग शिवलिंग पर नहीं किया जाता। कुमकुम भी इसी कारण वर्जित है।

शंख से जल

शंखचूड़ नामक असुर का वध शिव ने किया था, और शंख उसी से उत्पन्न माना जाता है। इसी कारण शिव को शंख से जल अर्पित नहीं किया जाता, जबकि विष्णु पूजा में शंख अनिवार्य है।

नारियल का जल

नारियल लक्ष्मी से संबद्ध माना गया है। नारियल शिव को अर्पित किया जा सकता है, किंतु उसका जल अभिषेक में प्रयुक्त नहीं होता।

अभिषेक की सही विधि

अभिषेक करते समय मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखें। जल की धार पतली और अखंड हो — एक साथ उड़ेलना उचित नहीं माना जाता। तांबे के पात्र से दूध अर्पित नहीं किया जाता; दूध के लिए पीतल या चाँदी का पात्र प्रयोग करें।

जलहरी की परिक्रमा पूर्ण नहीं की जाती — अर्धचंद्राकार परिक्रमा कर वापस लौटने का विधान है, क्योंकि जलहरी से बहने वाली निर्मली को लाँघा नहीं जाता।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवलिंग पर तुलसी क्यों नहीं चढ़ती?

तुलसी अपने पूर्व जन्म में वृंदा थीं, जिनके पति जालंधर का वध शिव ने किया था। इसी कथा के कारण तुलसी शिव पूजा में वर्जित मानी जाती है।

क्या शिवलिंग पर हल्दी चढ़ा सकते हैं?

नहीं। हल्दी सौभाग्य और शृंगार से जुड़ी है तथा देवी पूजा में प्रयुक्त होती है। शिव के वैरागी स्वरूप के कारण इसका निषेध है।

शिवलिंग की परिक्रमा कैसे करें?

पूर्ण परिक्रमा नहीं की जाती। जलहरी तक जाकर अर्धचंद्राकार में वापस लौटा जाता है, क्योंकि निर्मली को लाँघना वर्जित माना गया है।

बेलपत्र कैसे चढ़ाएँ?

तीन पत्तों वाला बेलपत्र, चिकनी सतह शिवलिंग की ओर रखकर अर्पित करें। कटा-फटा या सूखा बेलपत्र प्रयोग न करें।