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क्या आप लोग धूमावती माता Dhumavati Mata जी के बारे में जानना चाहते हैं? नमस्कार दोस्तों, दस महाविद्याओं में सातवीं महाविद्या धूमावती माता Dhumavati Mata जी हैं।
क्या आप लोग धूमावती माता Dhumavati Mata जी के बारे में जानना चाहते हैं? नमस्कार दोस्तों, दस महाविद्याओं…
क्या आप लोग धूमावती माता Dhumavati Mata जी के बारे में जानना चाहते हैं? नमस्कार दोस्तों, दस महाविद्याओं में सातवीं महाविद्या धूमावती माता Dhumavati Mata जी हैं।

मां की दो भुजाएं होती हैं, जिनमें से एक हाथ में सूप होता है और दूसरा वरदान मुद्रा में होता है। सूप को प्रतीक रूप में देखा जाए तो यह संसार की अस्थिरता, माया और ममता के त्याग का संदेश देता है। वहीं वरदान मुद्रा यह दर्शाती है की मां अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं और उनके कष्टों को दूर करती हैं।
धूमावती माता Dhumavati Mata जी की पूजा विशेष रूप से उन लोगों द्वारा की जाती है जो जीवन में कठिनाइयों से गुजर रहे होते हैं या जिन्हें मानसिक और आत्मिक शक्ति की आवश्यकता होती है। साधक इस दिन व्रत रखते हैं और मां के विशेष मंत्रों से आराधना करते हैं।
माना जाता है की मां धूमावती Dhumavati Mata जी की कृपा से शत्रु पर विजय, दुखों से मुक्ति और गूढ़ ज्ञान की प्राप्ति होती है। उनका यह स्वरूप हमें सिखाता है की जीवन में त्याग, धैर्य और आत्मबल से सभी संकटों पर विजय पाई जा सकती है, जय मां धूमावती Dhumavati Mata जी की ।
यहां पर आपको बताया गया है की मां धूमावती जी का Dhumavati Mata जी की जयंती ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पूरे देश में मनाई जाती है। इसके अलावा मां धूमावती जी का Dhumavati Mata स्वरूप कैसा होता है इसके बारे में भी जानकारी दी गई है।