भैरव की पूजा से हर संकट होगा दूर! जानिए 51 शक्तिपीठों के रहस्यमय भैरवों की कथा और उनकी शक्तियों के बारे में।

प्रारंभिक परिचय हिंदू धर्म में 51 शक्तिपीठों का अत्यधिक महत्व है। ये पवित्र स्थल देवी सती के शरीर…

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प्रारंभिक परिचय

हिंदू धर्म में 51 शक्तिपीठों का अत्यधिक महत्व है। ये पवित्र स्थल देवी सती के शरीर के विभिन्न अंगों के गिरने से बने, और प्रत्येक शक्तिपीठ की रक्षा के लिए भगवान शिव ने 51 भैरवों को प्रकट किया। भैरव, जो शिव जी का ही एक रूप है, इन शक्तिपीठों में माता सती की सुरक्षा और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देने के लिए प्रतिष्ठित हैं।

भैरवों की उत्पत्ति: भैरव का पहला रूप कैसे प्रकट हुआ?

प्रश्न: भैरवों की उत्पत्ति कैसे हुई?
उत्तर: भैरवों की उत्पत्ति की कथा बड़ी ही रोचक और अद्वितीय है। एक बार ब्रह्मा जी ने भगवान शिव के अघोर रूप की निंदा की, जिससे शिव जी अत्यधिक क्रोधित हो गए। इस क्रोध से शिव के भीतर से एक भयंकर आकृति प्रकट हुई, जिसे कालभैरव कहा गया। कालभैरव ने ब्रह्मा जी के पांचवें सिर को काटने का प्रयास किया, लेकिन शिव जी ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद शिव जी ने कालभैरव को काशी का रक्षक नियुक्त किया, और इस प्रकार, भैरव के रूप में उनकी पूजा होने लगी।