दिवाली 2026: लक्ष्मी पूजा विधि, मुहूर्त और सम्पूर्ण परंपरा

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दिवाली 2026 में 9 नवंबर, सोमवार को है — कार्तिक अमावस्या के दिन। लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में की जाती है, और स्थिर लग्न में पूजा को विशेष शुभ माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की पूजा होती है।

दिवाली सनातन परंपरा का सबसे व्यापक रूप से मनाया जाने वाला पर्व है। यह कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है — 2026 में 9 नवंबर, सोमवार को।

पर्व का आधार

दिवाली से अनेक कथाएँ जुड़ी हैं, और यही इसकी व्यापकता का कारण है:

  • श्रीराम का अयोध्या आगमन — चौदह वर्ष का वनवास और रावण वध के बाद अयोध्या लौटने पर नगरवासियों ने दीप जलाकर स्वागत किया
  • माता लक्ष्मी का प्राकट्य — समुद्र मंथन से इसी तिथि को लक्ष्मी प्रकट हुईं
  • महावीर स्वामी का निर्वाण — जैन परंपरा में इसी दिन
  • बंदी छोड़ दिवस — सिख परंपरा में गुरु हरगोबिंद जी की मुक्ति

अमावस्या पर दीप क्यों

दिवाली वर्ष की सबसे अंधेरी रात — अमावस्या — को मनाई जाती है। यही इसका केंद्रीय भाव है: तमसो मा ज्योतिर्गमय — अंधकार से प्रकाश की ओर।

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दीप जलाना केवल सजावट नहीं, प्रतीक है — जहाँ सबसे अधिक अंधकार हो, वहीं प्रकाश की सबसे अधिक आवश्यकता है।

लक्ष्मी पूजा का समय

लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में की जाती है — सूर्यास्त के बाद लगभग ढाई घंटे की अवधि। इसमें भी स्थिर लग्न — विशेषकर वृषभ लग्न — में पूजा को सर्वोत्तम माना जाता है।

स्थिर लग्न का भाव यह है कि लक्ष्मी स्थिर रहें, चंचल न हों।

शुभ मुहूर्त — 9 November 2026

तिथि कृष्ण पक्ष — अमावस्या
नक्षत्र स्वाति
सूर्योदय 06:39
सूर्यास्त 17:31
राहु काल 08:01 – 09:22 (इस समय शुभ कार्य टालें)
प्रदोष काल 17:31 – 19:55

ये समय दिल्ली के लिए गणित हैं और भारतीय मानक समय में दिए गए हैं। अन्य नगरों में सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर रहेगा। विवाह या गृह प्रवेश जैसे संस्कार के लिए स्थानीय पंचांग एवं आचार्य से पुष्टि करें।

पूजा विधि

  • पूजा स्थल को स्वच्छ कर लाल वस्त्र बिछाएँ
  • माता लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें — गणेश जी लक्ष्मी जी के बाईं ओर
  • कलश स्थापित करें — जल, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते सहित
  • बही-खाता और तिजोरी की पूजा करें
  • कमल पुष्प, बताशे, खील और मिष्ठान्न अर्पित करें
  • श्री सूक्त या लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें
  • घी का दीप जलाकर आरती करें
  • पूजा के बाद घर के हर कोने में दीप रखें

एक महत्वपूर्ण बात

गणेश जी की स्थापना में ध्यान रखें कि उनकी सूँड बाईं ओर मुड़ी हो — दाईं सूँड वाले गणेश की पूजा-विधि कठिन मानी जाती है और घर के लिए सामान्यतः बाईं सूँड वाली प्रतिमा ही ली जाती है।

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लक्ष्मी जी की बैठी हुई प्रतिमा घर के लिए और खड़ी प्रतिमा व्यापार स्थल के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

पाँच दिन का पर्व

दिन तिथि पर्व
7 नवंबर कृष्ण त्रयोदशी धनतेरस
8 नवंबर कृष्ण चतुर्दशी नरक चतुर्दशी
9 नवंबर अमावस्या दिवाली
10 नवंबर शुक्ल प्रतिपदा गोवर्धन पूजा
11 नवंबर शुक्ल द्वितीया भाई दूज

पटाखों पर एक बात

दीपावली मूलतः दीपों का पर्व है — पटाखे इसकी प्राचीन परंपरा का अंग नहीं हैं। वायु और ध्वनि प्रदूषण से बच्चों, वृद्धों, रोगियों और पशुओं को होने वाली कठिनाई को ध्यान में रखें।

दीप जलाना, रंगोली बनाना और परिवार के साथ पूजा — यही इस पर्व का मूल स्वरूप है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिवाली 2026 में कब है?

9 नवंबर 2026, सोमवार को। यह कार्तिक अमावस्या के दिन मनाई जाती है।

लक्ष्मी पूजा किस समय करें?

प्रदोष काल में — सूर्यास्त के बाद लगभग ढाई घंटे की अवधि। स्थिर लग्न, विशेषकर वृषभ लग्न, सर्वोत्तम माना जाता है।

गणेश जी को लक्ष्मी जी के किस ओर रखें?

बाईं ओर। साथ ही घर के लिए बाईं सूँड वाली गणेश प्रतिमा उपयुक्त मानी जाती है।

दिवाली अमावस्या को क्यों मनाई जाती है?

यह वर्ष की सबसे अंधेरी रात है। दीप जलाना अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का प्रतीक है — तमसो मा ज्योतिर्गमय।

लेखक

ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र लेखिका · 20 वर्ष का अनुभव

ज्योतिष, वैदिक कर्मकांड और स्वप्न-शास्त्र पर दो दशकों से लेखन कर रही हैं। दुर्गा सप्तशती, लाल किताब और नाड़ी ज्योतिष पर विशेष अध्ययन। पाठकों के प्रश्नों के आधार पर व्यावहारिक और शास्त्र-सम्मत मार्गदर्शन देती हैं।

  • योग्यता: ज्योतिष आचार्य, संस्कृत स्नातक
  • विशेषज्ञता: वैदिक ज्योतिष, लाल किताब, नाड़ी ज्योतिष, स्वप्न शास्त्र, व्रत एवं कर्मकांड