नरक चतुर्दशी 2026: छोटी दिवाली, अभ्यंग स्नान और रूप चतुर्दशी

Short answer

नरक चतुर्दशी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाती है — 2026 में 8 नवंबर, रविवार को। इसे छोटी दिवाली और रूप चतुर्दशी भी कहते हैं। सूर्योदय से पूर्व तेल-उबटन लगाकर अभ्यंग स्नान करने और संध्या को यम के नाम दीप जलाने की परंपरा है।

नरक चतुर्दशी दीपावली से एक दिन पूर्व मनाई जाती है — 2026 में 8 नवंबर, रविवार को। इसे छोटी दिवाली, रूप चतुर्दशी और काली चौदस भी कहा जाता है।

नरकासुर वध की कथा

कथा के अनुसार नरकासुर नामक असुर ने सोलह हजार कन्याओं को बंदी बना रखा था और देवताओं को त्रस्त कर रखा था।

भगवान कृष्ण ने सत्यभामा के साथ मिलकर उसका वध किया और सभी बंदिनी कन्याओं को मुक्त कराया। मुक्ति के बाद समाज में उनकी स्वीकृति का प्रश्न आया, तब कृष्ण ने उन्हें अपना नाम देकर सम्मान दिलाया।

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नरकासुर के वध की स्मृति में यह दिन मनाया जाता है — इसीलिए नरक चतुर्दशी।

अभ्यंग स्नान

इस दिन की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा अभ्यंग स्नान है। सूर्योदय से पूर्व, ब्रह्म मुहूर्त में तिल के तेल की मालिश कर उबटन लगाया जाता है और फिर स्नान किया जाता है।

मान्यता है कि इस दिन तेल में लक्ष्मी और जल में गंगा का वास होता है। स्नान के जल में अपामार्ग यानी चिरचिटा की पत्तियाँ डालने की परंपरा भी है।

इसी कारण इसे रूप चतुर्दशी कहा जाता है — रूप और सौंदर्य से जुड़ा दिन।

काली चौदस

बंगाल और कुछ अन्य क्षेत्रों में इसी रात माँ काली की पूजा की जाती है, जिसे काली चौदस या भूत चतुर्दशी कहा जाता है।

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बंगाल में इस रात चौदह दीप जलाने और चौदह प्रकार के साग खाने की परंपरा है, जो पूर्वजों की स्मृति से जुड़ी मानी जाती है।

यम दीपदान

संध्या को यमराज के नाम दीप जलाने की परंपरा इस दिन भी निभाई जाती है। कुछ क्षेत्रों में यह धनतेरस को और कुछ में नरक चतुर्दशी को की जाती है।

दिन की तैयारी

इस दिन घर की अंतिम सफाई पूरी की जाती है और अगले दिन की लक्ष्मी पूजा की तैयारी होती है। रंगोली बनाना और द्वार सजाना भी इसी दिन आरंभ होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नरक चतुर्दशी 2026 में कब है?

8 नवंबर 2026, रविवार को। यह कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाती है।

अभ्यंग स्नान कब करना चाहिए?

सूर्योदय से पूर्व, ब्रह्म मुहूर्त में। तिल के तेल की मालिश और उबटन के बाद स्नान किया जाता है।

नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली में क्या अंतर है?

कोई अंतर नहीं — ये एक ही दिन के अलग नाम हैं। इसे रूप चतुर्दशी और काली चौदस भी कहा जाता है।

नरकासुर का वध किसने किया था?

भगवान कृष्ण ने सत्यभामा के साथ मिलकर। उन्होंने सोलह हजार बंदिनी कन्याओं को मुक्त कराया था।

लेखक

ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र लेखिका · 20 वर्ष का अनुभव

ज्योतिष, वैदिक कर्मकांड और स्वप्न-शास्त्र पर दो दशकों से लेखन कर रही हैं। दुर्गा सप्तशती, लाल किताब और नाड़ी ज्योतिष पर विशेष अध्ययन। पाठकों के प्रश्नों के आधार पर व्यावहारिक और शास्त्र-सम्मत मार्गदर्शन देती हैं।

  • योग्यता: ज्योतिष आचार्य, संस्कृत स्नातक
  • विशेषज्ञता: वैदिक ज्योतिष, लाल किताब, नाड़ी ज्योतिष, स्वप्न शास्त्र, व्रत एवं कर्मकांड