पितृ पक्ष 2026 कब से शुरू होगा? 15 दिन क्या नहीं करना चाहिए?

पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत और 15 दिनों में क्या नहीं करना चाहिए, दर्शाता हुआ धार्मिक थंबनेल; श्राद्ध तर्पण, कौवा, दीपक और पितरों को समर्पित पूजा की झलक।

पितृ पक्ष हिंदू धर्म में अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य किए जाते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि पितृ पक्ष के दौरान कुछ कामों से बचने की परंपरा क्यों है? आइए जानते हैं पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत, इसका महत्व और इन दिनों क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

पितृ पक्ष 2026 कब से शुरू होगा?

पितृ पक्ष 2026 में 27 सितंबर 2026 से शुरू होने की उम्मीद है। इस दौरान अलग-अलग तिथियों के अनुसार पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है और अवधि का समापन सर्वपितृ अमावस्या पर होता है।

श्राद्ध की सटीक तिथि व्यक्ति के पूर्वज की मृत्यु तिथि और स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित की जाती है।

पितृ पक्ष में क्या नहीं करना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों कुछ कार्यों से बचने की परंपरा है:

1. विवाह और मांगलिक कार्य: पितृ पक्ष में विवाह, सगाई और गृह प्रवेश जैसे शुभ संस्कारों को टालने की परंपरा है।

2. मांस-मदिरा से बचें: इस अवधि में सात्विक भोजन करने की धार्मिक मान्यता है।

3. अनावश्यक उत्सव से बचें: पितृ पक्ष को पितरों के स्मरण का समय माना जाता है, इसलिए दिखावे और बड़े उत्सवों से बचने की परंपरा है।

4. क्रोध और विवाद से बचें: इन दिनों शांत मन से पितरों का स्मरण और धार्मिक कार्य करने की सलाह दी जाती है।

5. बाल-दाढ़ी कटवाने की मान्यता: कुछ परिवारों में पितृ पक्ष के दौरान बाल और दाढ़ी कटवाने से बचा जाता है। हालांकि, यह परंपरा हर परिवार में समान नहीं है।

पितृ पक्ष में क्या करना चाहिए?

पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करना, जरूरतमंदों को भोजन कराना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना इस अवधि की प्रमुख परंपराएं हैं।

कई परिवारों में कौवे, गाय और अन्य जीवों को भोजन कराने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता में कौवे को पितरों से जुड़ा प्रतीक माना जाता है।

क्या पितृ पक्ष में नई चीज खरीद सकते हैं?

इस विषय में अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों की मान्यताएं अलग हैं। कुछ लोग इस दौरान बड़ी या शुभ खरीदारी से बचते हैं, जबकि रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं खरीदना सामान्य माना जाता है।

इसलिए इसे सार्वभौमिक नियम के बजाय परिवार की परंपरा और स्थानीय मान्यता के अनुसार देखना बेहतर है।

निष्कर्ष

पितृ पक्ष केवल कुछ कामों को रोकने की अवधि नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों को याद करने, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और जरूरतमंदों की सहायता करने का अवसर भी माना जाता है।

धार्मिक परंपराएं परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती हैं, इसलिए किसी भी नियम को अपनाने से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग को ध्यान में रखना उचित है।

FAQs

पितृ पक्ष 2026 कब से शुरू होगा?

पितृ पक्ष 2026 में 27 सितंबर 2026 से शुरू होने की उम्मीद है। स्थानीय शहर और पंचांग के अनुसार तिथियों में अंतर हो सकता है।

पितृ पक्ष कितने दिनों का होता है?

पितृ पक्ष को आमतौर पर लगभग 15 दिनों की अवधि के रूप में जाना जाता है, जिसमें अलग-अलग तिथियों पर श्राद्ध किए जाते हैं।

पितृ पक्ष में क्या नहीं करना चाहिए?

धार्मिक परंपराओं में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य बड़े मांगलिक कार्यों को इस अवधि में टालने की मान्यता है। मांस-मदिरा और अनावश्यक उत्सव से बचने की परंपरा भी कई परिवारों में है।

क्या पितृ पक्ष में शादी कर सकते हैं?

परंपरागत रूप से पितृ पक्ष में विवाह जैसे मांगलिक संस्कार करने से बचा जाता है। हालांकि, व्यक्तिगत परिस्थितियों और अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में मतभेद हो सकते हैं।

क्या पितृ पक्ष में नई चीज खरीदना अशुभ है?

इस बारे में सभी जगह एक जैसी मान्यता नहीं है। कुछ परिवार बड़ी या शुभ खरीदारी से बचते हैं, जबकि सामान्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद को लेकर अलग परंपराएं हैं।

अगर किसी की श्राद्ध तिथि पता न हो तो क्या करें?

ऐसी स्थिति में सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है।

पितृ पक्ष में कौवे को भोजन क्यों कराया जाता है?

हिंदू धार्मिक मान्यता में कौवे को पितरों से जुड़ा प्रतीक माना जाता है। इसी कारण श्राद्ध के दौरान कौवे को भोजन कराने की परंपरा है।

क्या पितृ पक्ष में बाल कटवा सकते हैं?

कुछ धार्मिक परंपराओं में बाल और दाढ़ी कटवाने से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन यह सभी परिवारों में अनिवार्य नियम नहीं है।

पितृ पक्ष में कौन-कौन से काम करने चाहिए?

श्राद्ध, तर्पण, पितरों का स्मरण, दान-पुण्य और जरूरतमंदों को भोजन कराने जैसी परंपराएं पितृ पक्ष से जुड़ी हैं।

सर्वपितृ अमावस्या क्या होती है?

सर्वपितृ अमावस्या को पितृ पक्ष की अंतिम अमावस्या तिथि माना जाता है। जिन पितरों की श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं होती, उनके लिए इस दिन श्राद्ध करने की परंपरा कई हिंदू परिवारों में है।

लेखक

ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र लेखिका · 20 वर्ष का अनुभव

ज्योतिष, वैदिक कर्मकांड और स्वप्न-शास्त्र पर दो दशकों से लेखन कर रही हैं। दुर्गा सप्तशती, लाल किताब और नाड़ी ज्योतिष पर विशेष अध्ययन। पाठकों के प्रश्नों के आधार पर व्यावहारिक और शास्त्र-सम्मत मार्गदर्शन देती हैं।

  • योग्यता: ज्योतिष आचार्य, संस्कृत स्नातक
  • विशेषज्ञता: वैदिक ज्योतिष, लाल किताब, नाड़ी ज्योतिष, स्वप्न शास्त्र, व्रत एवं कर्मकांड