मुगलों से पहले का ये शिव मंदिर आज भी हर शाम गूंजता है गोमती किनारे की आरती से

मनकामेश्वर मंदिर लखनऊ (डालीगंज) में गोमती नदी के किनारे स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर है, जो मुगल काल से भी पहले का माना जाता है। यहां प्रतिदिन शाम को पारंपरिक आरती होती है, जो गोमती तट के वातावरण को भक्तिमय बना देती है। यह मंदिर लखनऊ शहर के रक्षक स्थल के रूप में भी जाना जाता है।

मंदिर की जानकारी

जानकारीविवरण
स्थानडालीगंज, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
देवताभगवान शिव
श्रेणीनगर रक्षक / धरोहर (City Guardian / Heritage)
कैसे पहुंचेंलखनऊ सिटी / चारबाग

मनकामेश्वर मंदिर को मुगल काल से पहले का क्यों माना जाता है?

मनकामेश्वर मंदिर को मुगल काल से पहले का प्राचीन शिव मंदिर माना जाता है। इतनी पुरानी ऐतिहासिक विरासत होने के कारण यह मंदिर लखनऊ के सबसे प्राचीन और श्रद्धेय धार्मिक स्थलों में गिना जाता है।

यहां शाम की आरती इतनी खास क्यों है?

मनकामेश्वर मंदिर में प्रतिदिन शाम को पारंपरिक आरती की जाती है, जो गोमती नदी के किनारे होती है। यह दैनिक आरती परंपरा वर्षों से निरंतर चली आ रही है, और शाम के समय यहां का माहौल भक्ति और शांति से भर जाता है।

यहां की खासियत

  • मुगल काल से भी पहले का प्राचीन शिव मंदिर
  • गोमती नदी के किनारे प्रतिदिन होने वाली पारंपरिक शाम की आरती
  • लखनऊ शहर के रक्षक स्थल के रूप में भी जाना जाता है

[दर्शनसमय और पूजाविधि से जुड़ी specific जानकारी अभी उपलब्ध data में नहीं है — यह section मंदिर ट्रस्ट की आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद जोड़ा जाए। आरती का सटीक समय verify करके जोड़ें।]

आसपास के अन्य मंदिर

यह जानकारी लोक मान्यता/परंपरा पर आधारित है।

FAQ

मनकामेश्वर मंदिर किसे समर्पित है?

यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।

मनकामेश्वर मंदिर कितना पुराना है?

यह मंदिर मुगल काल से भी पहले का माना जाता है।

मनकामेश्वर मंदिर तक कैसे पहुंचें?

लखनऊ सिटी या चारबाग रेलवे स्टेशन से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

लेखक

ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र लेखिका · 20 वर्ष का अनुभव

ज्योतिष, वैदिक कर्मकांड और स्वप्न-शास्त्र पर दो दशकों से लेखन कर रही हैं। दुर्गा सप्तशती, लाल किताब और नाड़ी ज्योतिष पर विशेष अध्ययन। पाठकों के प्रश्नों के आधार पर व्यावहारिक और शास्त्र-सम्मत मार्गदर्शन देती हैं।

  • योग्यता: ज्योतिष आचार्य, संस्कृत स्नातक
  • विशेषज्ञता: वैदिक ज्योतिष, लाल किताब, नाड़ी ज्योतिष, स्वप्न शास्त्र, व्रत एवं कर्मकांड