अगस्त 2026 व्रत-त्योहार सूची: सावन, रक्षाबंधन और दो ग्रहण
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अगस्त 2026 में सावन के चार सोमवार, कामिका एकादशी, सावन शिवरात्रि, नाग पंचमी, हरियाली तीज और रक्षाबंधन पड़ रहे हैं। इस माह की विशेषता यह है कि 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण — दोनों एक ही माह में हैं, और चंद्र ग्रहण रक्षाबंधन के दिन ही है।
अगस्त 2026 सामान्य वर्षों से भिन्न है। पूरा माह लगभग श्रावण के अंतर्गत आता है, और इसी माह में दो ग्रहण पड़ रहे हैं — एक सूर्य ग्रहण और एक चंद्र ग्रहण, जिसमें से दूसरा रक्षाबंधन के दिन ही है।
प्रमुख तिथियाँ
| तिथि | पर्व | विशेष |
|---|---|---|
| 3 अगस्त | सावन का पहला सोमवार | जलाभिषेक, सोलह सोमवार आरंभ |
| 10 अगस्त | सावन का दूसरा सोमवार | — |
| 11–12 अगस्त | सावन शिवरात्रि | चार प्रहर पूजा |
| 12 अगस्त | पूर्ण सूर्य ग्रहण | सूतक 12 घंटे पूर्व |
| 17 अगस्त | सावन का तीसरा सोमवार | — |
| 24 अगस्त | सावन का चौथा सोमवार | अंतिम सोमवार |
| 28 अगस्त | रक्षाबंधन + चंद्र ग्रहण | सूतक देखकर मुहूर्त तय करें |
अगस्त 2026 की प्रमुख तिथियाँ
| दिनांक | वार | तिथि | पर्व |
|---|---|---|---|
| 3 अगस्त | सोमवार | कृष्ण पंचमी | सावन सोमवार |
| 9 अगस्त | रविवार | कृष्ण एकादशी | कामिका एकादशी |
| 10 अगस्त | सोमवार | कृष्ण द्वादशी | सावन सोमवार |
| 11 अगस्त | मंगलवार | कृष्ण चतुर्दशी | सावन शिवरात्रि |
| 12 अगस्त | बुधवार | कृष्ण अमावस्या | हरियाली अमावस्या + सूर्य ग्रहण |
| 15 अगस्त | शनिवार | शुक्ल तृतीया | हरियाली तीज |
| 16 अगस्त | रविवार | शुक्ल चतुर्थी | विनायक चतुर्थी |
| 17 अगस्त | सोमवार | शुक्ल पंचमी | नाग पंचमी + सावन सोमवार |
| 23 अगस्त | रविवार | शुक्ल एकादशी | पुत्रदा एकादशी |
| 24 अगस्त | सोमवार | शुक्ल द्वादशी | सावन सोमवार |
| 26 अगस्त | बुधवार | शुक्ल त्रयोदशी | प्रदोष व्रत |
| 28 अगस्त | शुक्रवार | शुक्ल पूर्णिमा | रक्षाबंधन / श्रावण पूर्णिमा + चंद्र ग्रहण |
| 31 अगस्त | सोमवार | कृष्ण तृतीया | सावन सोमवार |
तिथियाँ दिल्ली के सूर्योदय के आधार पर गणित हैं। क्षेत्रीय पंचांग में एक दिन का अंतर संभव है।
इस माह की तीन विशेष बातें
1. एक ही माह में दो ग्रहण
सूर्य ग्रहण अमावस्या को और चंद्र ग्रहण पूर्णिमा को होता है। दोनों का एक ही माह में पड़ना असामान्य नहीं, पर हर वर्ष नहीं होता। ग्रहण के सूतक का नियम केवल उन क्षेत्रों में लागू होता है जहाँ वह दृश्य हो।
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2. रक्षाबंधन पर ग्रहण
28 अगस्त को चंद्र ग्रहण रक्षाबंधन के साथ पड़ रहा है। परंपरा के अनुसार सूतक काल में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, इसलिए राखी सूतक से पूर्व या ग्रहण समाप्ति के बाद बाँधी जाएगी। भद्रा का विचार भी साथ में करना होगा।
3. चातुर्मास जारी
पूरा अगस्त चातुर्मास के भीतर है। इस कारण विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक संस्कार इस माह नहीं किए जाते। व्रत, दान और जप का महत्व बढ़ जाता है।
तिथि क्यों बदलती है
हिंदू पंचांग चंद्र आधारित है, इसलिए तिथियाँ प्रत्येक वर्ष अंग्रेजी कैलेंडर में आगे-पीछे होती हैं। इसके अतिरिक्त उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण भारत में अमांत गणना प्रचलित है, जिससे मास का आरंभ अलग-अलग पड़ता है।
यही कारण है कि एक ही पर्व की तिथि दो पंचांगों में एक दिन आगे-पीछे दिख सकती है। व्रत रखने से पूर्व अपने क्षेत्रीय पंचांग से पुष्टि कर लेना उचित रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अगस्त 2026 में कितने ग्रहण हैं?
दो — 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण। दूसरा रक्षाबंधन के दिन ही पड़ रहा है।
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सावन के सोमवार कब-कब हैं?
3, 10, 17 और 24 अगस्त 2026 को। कुल चार सोमवार, जिनमें जलाभिषेक और व्रत की परंपरा है।
क्या अगस्त 2026 में विवाह हो सकता है?
नहीं। पूरा माह चातुर्मास के भीतर है, जिसमें विवाह सहित मांगलिक संस्कार नहीं किए जाते।
तिथियाँ अलग-अलग जगह अलग क्यों दिखती हैं?
पूर्णिमांत और अमांत गणना के अंतर से। उत्तर और दक्षिण भारत के पंचांगों में मास का आरंभ भिन्न होता है, जिससे तिथि एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।





