51 शक्तिपीठों में शामिल ये मंदिर खुद गोरखनाथ ने किया था स्थापित — जानिए इतिहास

देवीपाटन मंदिर बलरामपुर (तुलसीपुर) में स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक प्रमुख शक्तिपीठ है, जहां मां पाटेश्वरी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि यह वह स्थान है जहां माता सती का बायां कंधा गिरा था, और इस मंदिर की स्थापना स्वयं गुरु गोरखनाथ ने की थी, जिससे यह शक्ति और नाथ परंपरा दोनों का संगम बन जाता है।

मंदिर की जानकारी

जानकारीविवरण
स्थानतुलसीपुर, बलरामपुर, उत्तर प्रदेश
देवतामाँ पाटेश्वरी
श्रेणी51 शक्तिपीठ / नाथ परंपरा (51 Shakti Peeth / Nath Tradition)
कैसे पहुंचेंगोंडा जंक्शन रेलवे स्टेशन / अयोध्या एयरपोर्ट (AYJ)

देवीपाटन मंदिर को शक्तिपीठ क्यों माना जाता है?

हिंदू मान्यता के अनुसार, 51 शक्तिपीठों में से एक देवीपाटन मंदिर वह स्थान माना जाता है जहां माता सती का बायां कंधा गिरा था। इसी पौराणिक मान्यता के कारण इसे एक महत्वपूर्ण शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है, और श्रद्धालु दूर-दूर से यहां दर्शन के लिए आते हैं।

देवीपाटन मंदिर की स्थापना गुरु गोरखनाथ ने क्यों की थी?

देवीपाटन मंदिर की स्थापना गुरु गोरखनाथ ने की थी, जो नाथ संप्रदाय के प्रमुख संत और योगी माने जाते हैं। इस वजह से यह मंदिर सिर्फ एक शक्तिपीठ ही नहीं, बल्कि नाथ परंपरा से भी गहराई से जुड़ा हुआ है, जो इसे एक अनोखी धार्मिक पहचान देता है।

यहां की खासियत

  • 51 शक्तिपीठों में शामिल, जहां माता सती का बायां कंधा गिरा था
  • गुरु गोरखनाथ द्वारा स्थापित, नाथ परंपरा से जुड़ा शक्तिपीठ
  • शक्ति उपासना और नाथ संप्रदाय दोनों परंपराओं का संगम

[दर्शनसमय और पूजाविधि से जुड़ी specific जानकारी अभी उपलब्ध data में नहीं है — यह section मंदिर ट्रस्ट की आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद जोड़ा जाए।]

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FAQ

यह जानकारी लोक मान्यता/परंपरा पर आधारित है।

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देवीपाटन मंदिर किस देवी को समर्पित है?

यह मंदिर माँ पाटेश्वरी को समर्पित है, और यह 51 शक्तिपीठों में से एक है।

देवीपाटन मंदिर की स्थापना किसने की थी?

इस मंदिर की स्थापना गुरु गोरखनाथ ने की थी, जो नाथ संप्रदाय के प्रमुख संत माने जाते हैं।

देवीपाटन मंदिर तक कैसे पहुंचें?

गोंडा जंक्शन रेलवे स्टेशन या अयोध्या एयरपोर्ट (AYJ) से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

लेखक

ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र लेखिका · 20 वर्ष का अनुभव

ज्योतिष, वैदिक कर्मकांड और स्वप्न-शास्त्र पर दो दशकों से लेखन कर रही हैं। दुर्गा सप्तशती, लाल किताब और नाड़ी ज्योतिष पर विशेष अध्ययन। पाठकों के प्रश्नों के आधार पर व्यावहारिक और शास्त्र-सम्मत मार्गदर्शन देती हैं।

  • योग्यता: ज्योतिष आचार्य, संस्कृत स्नातक
  • विशेषज्ञता: वैदिक ज्योतिष, लाल किताब, नाड़ी ज्योतिष, स्वप्न शास्त्र, व्रत एवं कर्मकांड