किले की चट्टानों में तराशी गई 18 भुजाओं वाली भैरव प्रतिमा — कालिंजर का ये रहस्य कम लोग जानते हैं
कालिंजर शिव नीलकंठ मंदिर बांदा (कालिंजर किला) में स्थित एक अनोखा शैल-कृत मंदिर है, जो भगवान नीलकंठ महादेव को समर्पित है। यहां किले की चट्टानों में तराशी गई 18 भुजाओं वाली भव्य भैरव प्रतिमा और एक सदानीरा पर्वतीय जलस्रोत इस मंदिर को देश के सबसे अनोखे शिव तीर्थ स्थलों में से एक बनाते हैं।
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मंदिर की जानकारी
| जानकारी | विवरण |
| स्थान | कालिंजर किला, बांदा, उत्तर प्रदेश |
| देवता | नीलकंठ महादेव |
| श्रेणी | शैल-कृत पहाड़ी किला मंदिर (Rock-Cut Hill Fort Temple) |
| कैसे पहुंचें | अटर्रा / बांदा (55 किमी) |
कालिंजर किले की 18 भुजाओं वाली भैरव प्रतिमा इतनी खास क्यों है?
कालिंजर किले की चट्टानों में तराशी गई 18 भुजाओं वाली भैरव प्रतिमा अपनी भव्यता और शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है। इतनी बड़ी संख्या में भुजाओं वाली मूर्तिकला देश में कम ही देखने को मिलती है, जिससे यह प्रतिमा कला-इतिहास की दृष्टि से भी बेहद खास मानी जाती है।

यहां का पर्वतीय जलस्रोत क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?
मंदिर परिसर में एक सदानीरा पर्वतीय जलस्रोत भी स्थित है, जो वर्ष भर बहता रहता है। इस प्राकृतिक जलस्रोत को श्रद्धालु पवित्र मानते हैं, और यही वजह है कि यह मंदिर आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सुंदरता दोनों का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है।

यहां की खासियत
- किले की चट्टानों में तराशी गई भव्य 18 भुजाओं वाली भैरव प्रतिमा
- मंदिर परिसर में स्थित सदानीरा पर्वतीय जलस्रोत
- कालिंजर किले के भीतर स्थित एक अनोखा शैल-कृत शिव मंदिर
[दर्शन–समय और पूजा–विधि से जुड़ी specific जानकारी अभी उपलब्ध data में नहीं है — यह section मंदिर ट्रस्ट/ASI की आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद जोड़ा जाए।]
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यह जानकारी लोक मान्यता/परंपरा पर आधारित है।
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FAQ
कालिंजर शिव नीलकंठ मंदिर किसे समर्पित है?
यह मंदिर भगवान नीलकंठ महादेव को समर्पित है।
यहां की भैरव प्रतिमा की क्या खासियत है?
यहां किले की चट्टानों में तराशी गई 18 भुजाओं वाली भव्य भैरव प्रतिमा स्थित है।
कालिंजर शिव नीलकंठ मंदिर तक कैसे पहुंचें?
अटर्रा या बांदा (55 किमी) से इस मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।





