एकादशी कब है? जानिए 2026 में आने वाली सभी एकादशी तिथियाँ, महत्व और व्रत विधि
Short answer
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। हर महीने में दो एकादशी आती हैं—एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में। इस प्रकार पूरे वर्ष में कुल 24 एकादशी होती हैं, जबकि अधिक मास होने पर इनकी संख्या बढ़ भी सकती है।
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। हर महीने में दो एकादशी आती हैं—एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में। इस प्रकार पूरे वर्ष में कुल 24 एकादशी होती हैं, जबकि अधिक मास होने पर इनकी संख्या बढ़ भी सकती है।
अक्सर लोग यह जानना चाहते हैं कि “एकादशी कब है?” ताकि वे समय पर व्रत रख सकें, पूजा कर सकें और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें। इस लेख में हम आपको एकादशी की तिथि, महत्व, व्रत विधि और लाभ के बारे में विस्तार से बताएंगे।
Table of Contents
एकादशी क्या होती है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस दिन व्रत रखने, पूजा-पाठ करने और सात्विक जीवन अपनाने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
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मान्यता है कि एकादशी व्रत करने से पापों का नाश होता है, मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
2026 में एकादशी कब है? (मुख्य तिथियाँ)
यहाँ कुछ प्रमुख एकादशी तिथियाँ दी गई हैं:
जनवरी 2026
- सफला एकादशी – 4 जनवरी
- पुत्रदा एकादशी – 19 जनवरी
फरवरी 2026
- षटतिला एकादशी – 3 फरवरी
- जया एकादशी – 18 फरवरी
मार्च 2026
- विजया एकादशी – 5 मार्च
- आमलकी एकादशी – 20 मार्च

अप्रैल 2026
- पापमोचनी एकादशी – 3 अप्रैल
- कामदा एकादशी – 18 अप्रैल
मई 2026
- वरुथिनी एकादशी – 2 मई
- मोहिनी एकादशी – 17 मई
(पूरे वर्ष की विस्तृत सूची पंचांग के अनुसार देखी जा सकती है)
एकादशी व्रत का महत्व
एकादशी व्रत को सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना गया है। इसके कई आध्यात्मिक और धार्मिक लाभ बताए गए हैं:
- भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है
- पापों का नाश होता है
- मन शांत और स्थिर होता है
- आर्थिक समस्याओं में राहत मिलती है
- परिवार में सुख-समृद्धि आती है
- मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है
विशेष रूप से निर्जला एकादशी, देवशयनी एकादशी, प्रबोधिनी एकादशी और वैकुंठ एकादशी का बहुत अधिक महत्व माना जाता है।
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एकादशी व्रत विधि
यदि आप पहली बार एकादशी व्रत रख रहे हैं, तो यह सरल विधि अपनाएं:
1. सुबह जल्दी उठें
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
2. भगवान विष्णु की पूजा करें
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। तुलसी पत्र अवश्य अर्पित करें।
3. व्रत का संकल्प लें
पूरे दिन सात्विक भोजन या फलाहार का नियम रखें।
4. मंत्र जाप करें
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
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5. रात्रि में भजन-कीर्तन
संभव हो तो रात्रि जागरण और विष्णु भजन करें।
6. द्वादशी को पारण करें
अगले दिन यानी द्वादशी को नियमपूर्वक व्रत खोलें।
एकादशी के दिन क्या नहीं करना चाहिए?
- चावल का सेवन नहीं करना चाहिए
- तामसिक भोजन से बचें
- क्रोध और विवाद से दूर रहें
- झूठ और अपशब्दों से बचें
- नकारात्मक विचारों से दूरी रखें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एकादशी कब से कब तक रहती है?
एकादशी तिथि पंचांग के अनुसार शुरू और समाप्त होती है, इसलिए हर महीने समय अलग हो सकता है।
क्या बिना व्रत के पूजा कर सकते हैं?
हाँ, यदि स्वास्थ्य कारणों से व्रत संभव न हो तो केवल पूजा और भक्ति भी की जा सकती है।
एकादशी में चावल क्यों नहीं खाते?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है।
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निष्कर्ष
यदि आप भी जानना चाहते हैं कि “एकादशी कब है”, तो हर महीने पंचांग देखकर सही तिथि पर व्रत रखें। यह केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मन और आत्मा को शुद्ध करने का एक श्रेष्ठ माध्यम भी है।
भगवान विष्णु की कृपा पाने और जीवन में सुख-शांति लाने के लिए एकादशी व्रत अवश्य करें।
जय श्री हरि विष्णु 🙏





