हरियाली तीज 2026: व्रत विधि, कथा और सोलह शृंगार का महत्व
Short answer
हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है और यह शिव-पार्वती के पुनर्मिलन का पर्व है। विवाहित स्त्रियाँ पति की दीर्घायु तथा अविवाहित कन्याएँ मनोवांछित वर की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं। हरे वस्त्र, मेहंदी और झूले इस पर्व की पहचान हैं।
हरियाली तीज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। नाम में ही इसका भाव है — वर्षा के बाद की हरियाली, और उसी के साथ यह पर्व उत्तर भारत में विशेष उल्लास से मनाया जाता है।
पर्व का आधार
पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए 108 जन्मों तक तपस्या की। श्रावण शुक्ल तृतीया को शिव ने उन्हें स्वीकार किया — यही दिन हरियाली तीज के रूप में मनाया जाता है।
इसी कारण यह पर्व वैवाहिक जीवन, प्रतीक्षा और निष्ठा से जोड़ा जाता है।
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व्रत विधि
- प्रातः स्नान कर हरे वस्त्र धारण किए जाते हैं
- शिव-पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर पूजा की जाती है
- माता पार्वती को सुहाग सामग्री — चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी — अर्पित की जाती है
- शिव को बेलपत्र, धतूरा और जल अर्पित होता है
- तीज कथा का श्रवण किया जाता है
- रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन की परंपरा है
यह व्रत परंपरागत रूप से निर्जला रखा जाता है — अन्न और जल दोनों का त्याग। अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है।
सोलह शृंगार
इस दिन सोलह शृंगार की परंपरा है — बिंदी, सिंदूर, काजल, मेहंदी, चूड़ी, मंगलसूत्र, नथ, कर्णफूल, बाजूबंद, कमरबंद, बिछिया, पायल, अंगूठी, गजरा, केश-सज्जा और वस्त्र।
मेहंदी का विशेष महत्व है। परंपरा में कहा जाता है कि मेहंदी का रंग जितना गहरा हो, दांपत्य प्रेम उतना ही प्रगाढ़ माना जाता है — यह लोक-मान्यता है, शास्त्रीय विधान नहीं।
झूला और लोकगीत
हरियाली तीज पर पेड़ों पर झूले डालने और तीज के लोकगीत गाने की परंपरा है। राजस्थान में तीज माता की सवारी निकाली जाती है, और यह पर्व वहाँ राजकीय स्तर पर मनाया जाता है।
उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और मध्य प्रदेश में विवाहित स्त्रियाँ इस दिन मायके जाती हैं — सिंधारा भेजने की परंपरा इसी से जुड़ी है, जिसमें मायके से वस्त्र, मिठाई और शृंगार सामग्री भेजी जाती है।
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एक व्यावहारिक सुझाव
निर्जला व्रत वर्षा ऋतु में भी शरीर पर भार डालता है। गर्भवती स्त्रियाँ, मधुमेह या रक्तचाप की रोगी और अस्वस्थ महिलाएँ फलाहार व्रत रख सकती हैं। परंपरा में भी सामर्थ्य के अनुसार व्रत का ही विधान है।
शुभ मुहूर्त — 15 August 2026
| तिथि | शुक्ल पक्ष — तृतीया |
|---|---|
| नक्षत्र | उत्तरा फाल्गुनी |
| सूर्योदय | 05:51 |
| सूर्यास्त | 19:01 |
| राहु काल | 09:08 – 10:47 (इस समय शुभ कार्य टालें) |
| अभिजित मुहूर्त | 11:59 – 12:52 (दिन का सर्वोत्तम मुहूर्त) |
| प्रदोष काल | 19:01 – 21:25 |
ये समय दिल्ली के लिए गणित हैं और भारतीय मानक समय में दिए गए हैं। अन्य नगरों में सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर रहेगा। विवाह या गृह प्रवेश जैसे संस्कार के लिए स्थानीय पंचांग एवं आचार्य से पुष्टि करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हरियाली तीज 2026 में कब है?
श्रावण शुक्ल तृतीया को। सटीक तिथि क्षेत्रीय पंचांग से मिलाएँ, क्योंकि तृतीया का आरंभ और समाप्ति स्थान के अनुसार बदलती है।
क्या हरियाली तीज का व्रत निर्जला होता है?
परंपरागत रूप से हाँ — अन्न और जल दोनों का त्याग। स्वास्थ्य कारणों से फलाहार व्रत भी स्वीकार्य माना जाता है।
हरियाली तीज और कजरी तीज में क्या अंतर है?
हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को और कजरी तीज भाद्रपद कृष्ण तृतीया को होती है। दोनों में शिव-पार्वती की पूजा होती है, पर तिथि और क्षेत्रीय परंपराएँ भिन्न हैं।
क्या अविवाहित कन्याएँ यह व्रत रख सकती हैं?
हाँ। अविवाहित कन्याएँ मनोवांछित वर की कामना से यह व्रत रखती हैं, जैसे माता पार्वती ने शिव के लिए तप किया था।





