कजरी तीज 2026: व्रत विधि, नीम पूजा और कजरी गीतों की परंपरा

Short answer

कजरी तीज भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है, जो हरियाली तीज के लगभग पंद्रह दिन बाद आती है। इस दिन नीम की डाल की पूजा, चंद्रमा को अर्घ्य और कजरी लोकगीतों की परंपरा है। विवाहित स्त्रियाँ पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती हैं।

कजरी तीज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। इसे बड़ी तीज या सातूड़ी तीज भी कहा जाता है, और यह हरियाली तीज के लगभग पंद्रह दिन बाद आती है।

हरियाली तीज से अंतर

हरियाली तीज कजरी तीज
तिथि श्रावण शुक्ल तृतीया भाद्रपद कृष्ण तृतीया
प्रमुख क्षेत्र राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार
विशेष पूजा शिव-पार्वती नीम की डाल, चंद्रमा को अर्घ्य
पहचान झूला, हरे वस्त्र, मेहंदी कजरी लोकगीत, सत्तू

नीम पूजा की परंपरा

कजरी तीज की सबसे विशिष्ट परंपरा नीम की डाल की पूजा है। दीवार पर नीम की डाल स्थापित कर उसे नीमड़ी माता के रूप में पूजा जाता है।

पूजा स्थल पर एक छोटा तालाब बनाया जाता है, जिसमें जल भरकर दीप जलाया जाता है। नीमड़ी माता को सत्तू, चना, फल और नए वस्त्र अर्पित किए जाते हैं।

यह भी पढ़ें: रक्षाबंधन पर ग्रहण: क्या इस बार राखी बांधना शुभ रहेगा? 

नीम को औषधीय गुणों के कारण भी सम्मान प्राप्त है — वर्षा ऋतु के अंत में जब संक्रमण का भय अधिक होता है, नीम की पूजा में स्वास्थ्य-विवेक भी दिखाई देता है।

व्रत विधि

  • प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें
  • दिनभर निर्जला व्रत रखा जाता है
  • संध्या को नीमड़ी माता की पूजा करें
  • सत्तू, चना और मौसमी फल अर्पित करें
  • कजरी तीज की कथा सुनें
  • चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें
  • अर्घ्य के बाद ही पारण किया जाता है

सत्तू का महत्व

इस पर्व को सातूड़ी तीज कहने का कारण सत्तू है। चने और जौ के सत्तू से बने व्यंजन इस दिन बनाए और अर्पित किए जाते हैं। सत्तू शीतल और सुपाच्य माना जाता है — निर्जला व्रत के बाद पारण के लिए उपयुक्त आहार।

कजरी गीत

कजरी उत्तर भारत की वर्षा-ऋतु की लोकगायन परंपरा है। मिर्जापुर और बनारस की कजरी विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इन गीतों में विरह, प्रतीक्षा और वर्षा का वर्णन होता है।

तीज की रात स्त्रियाँ समूह में कजरी गाती हैं — यह पर्व का सामाजिक पक्ष है, जो इसे केवल व्रत से आगे एक सामुदायिक उत्सव बनाता है।

स्वास्थ्य संबंधी सावधानी

यह व्रत निर्जला रखा जाता है और चंद्रोदय तक चलता है, जो देर हो सकता है। गर्भवती स्त्रियाँ, मधुमेह या रक्तचाप की रोगी और अस्वस्थ महिलाएँ फलाहार व्रत रखें। परंपरा में भी सामर्थ्य के अनुसार व्रत का ही विधान है।

यह भी पढ़ें: गणेश चतुर्थी 2024: गणपति की स्थापना करते समय इन 4 महत्वपूर्ण गलतियों से बचें और पाएं बप्पा का आशीर्वाद

शुभ मुहूर्त — 1 September 2026

तिथि कृष्ण पक्ष — चतुर्थी
नक्षत्र अश्विनी
सूर्योदय 05:60
सूर्यास्त 18:43
राहु काल 15:32 – 17:08 (इस समय शुभ कार्य टालें)
अभिजित मुहूर्त 11:56 – 12:47 (दिन का सर्वोत्तम मुहूर्त)

ये समय दिल्ली के लिए गणित हैं और भारतीय मानक समय में दिए गए हैं। अन्य नगरों में सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर रहेगा। विवाह या गृह प्रवेश जैसे संस्कार के लिए स्थानीय पंचांग एवं आचार्य से पुष्टि करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कजरी तीज 2026 में कब है?

भाद्रपद कृष्ण तृतीया को, हरियाली तीज के लगभग पंद्रह दिन बाद। सटीक तिथि क्षेत्रीय पंचांग से मिलाएँ।

कजरी तीज पर नीम की पूजा क्यों होती है?

नीम की डाल को नीमड़ी माता के रूप में पूजा जाता है। नीम के औषधीय गुण और वर्षा ऋतु के अंत में स्वास्थ्य-रक्षा की परंपरा इससे जुड़ी मानी जाती है।

सातूड़ी तीज नाम क्यों पड़ा?

इस दिन सत्तू से बने व्यंजन बनाए और अर्पित किए जाते हैं, इसीलिए इसे सातूड़ी तीज भी कहा जाता है।

पारण कब किया जाता है?

चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पारण किया जाता है।

लेखक

ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र लेखिका · 20 वर्ष का अनुभव

ज्योतिष, वैदिक कर्मकांड और स्वप्न-शास्त्र पर दो दशकों से लेखन कर रही हैं। दुर्गा सप्तशती, लाल किताब और नाड़ी ज्योतिष पर विशेष अध्ययन। पाठकों के प्रश्नों के आधार पर व्यावहारिक और शास्त्र-सम्मत मार्गदर्शन देती हैं।

  • योग्यता: ज्योतिष आचार्य, संस्कृत स्नातक
  • विशेषज्ञता: वैदिक ज्योतिष, लाल किताब, नाड़ी ज्योतिष, स्वप्न शास्त्र, व्रत एवं कर्मकांड