पारण के नियम: जानिए कैसे पारण से मिलेगी समृद्धि और सुख

पारण के नियम: जानिए कैसे पारण से मिलेगी समृद्धि और सुख

Short answer

षटतिला एकादशी के दिन पारण करने के कुछ विशेष नियम और विधियाँ होती हैं, जिन्हें ध्यान में रखना आवश्यक है। यहाँ पर पारण के नियमों की जानकारी दी गई है:

षटतिला एकादशी के दिन पारण करने के कुछ विशेष नियम और विधियाँ होती हैं, जिन्हें ध्यान में रखना आवश्यक है। यहाँ पर पारण के नियमों की जानकारी दी गई है:

पारण के नियम

  1. पारण का समय: एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है। 2025 में, पारण का शुभ समय 26 जनवरी, 2025 को सुबह 7:12 बजे से 9:21 बजे तक होगा। यह सुनिश्चित करें कि पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले किया जाए।
  2. तुलसी का महत्व: पारण करते समय तुलसी का पत्ता मुंह में रखना चाहिए। भगवान विष्णु को तुलसी प्रिय है, इसलिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
  3. आंवला का सेवन: आंवले का सेवन करना भी शुभ माना जाता है। आंवला खाकर पारण करना चाहिए, क्योंकि मान्यता है कि आंवले के पेड़ पर भगवान का वास होता है।
  4. भोजन में गाय का घी: पारण के लिए पकाए जा रहे भोजन में गाय के घी का उपयोग करना चाहिए। यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।
  5. सात्विक भोजन: पारण के लिए केवल सात्विक भोजन का सेवन करें। चावल, दालें, सब्जियाँ आदि शामिल करें, लेकिन मूली, बैंगन, लहसुन, प्याज और मसूर दाल जैसे खाद्य पदार्थों से बचें।
  6. नकारात्मकता से दूर रहना: पारण के समय हिंसा, क्रोध आदि नकारात्मक भावनाओं से दूर रहना चाहिए।

निष्कर्ष

इन नियमों का पालन करके आप अपने व्रत को सही तरीके से पूरा कर सकते हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। यह दिन विशेष रूप से तिल और आंवले के सेवन के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे आपको आध्यात्मिक और भौतिक लाभ मिलते हैं।

लेखक

ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र लेखिका · 20 वर्ष का अनुभव

ज्योतिष, वैदिक कर्मकांड और स्वप्न-शास्त्र पर दो दशकों से लेखन कर रही हैं। दुर्गा सप्तशती, लाल किताब और नाड़ी ज्योतिष पर विशेष अध्ययन। पाठकों के प्रश्नों के आधार पर व्यावहारिक और शास्त्र-सम्मत मार्गदर्शन देती हैं।

  • योग्यता: ज्योतिष आचार्य, संस्कृत स्नातक
  • विशेषज्ञता: वैदिक ज्योतिष, लाल किताब, नाड़ी ज्योतिष, स्वप्न शास्त्र, व्रत एवं कर्मकांड