सती का दाहिना हाथ यहीं गिरा था — कड़ा प्रांत की ऐतिहासिक राजधानी में बसा है ये प्राचीन शक्तिपीठ

शीतला माता मंदिर (कड़ा) कौशाम्बी में स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक प्राचीन शक्तिपीठ है, जहां मां शीतला की पूजा होती है। मान्यता है कि यह वह स्थान है जहां माता सती का दाहिना हाथ गिरा था। यह स्थान ऐतिहासिक रूप से कड़ा प्रांत की राजधानी भी रहा है, जिससे इसे धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों ही दृष्टि से विशेष महत्व प्राप्त है।

मंदिर की जानकारी

जानकारीविवरण
स्थानकड़ा धाम, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश
देवतामाँ शीतला
श्रेणीप्राचीन 51 शक्तिपीठ (Ancient 51 Shakti Peeth)
कैसे पहुंचेंसिराथू / प्रयागराज (60 किमी)

शीतला माता मंदिर (कड़ा) को शक्तिपीठ क्यों माना जाता है?

हिंदू मान्यता के अनुसार, 51 शक्तिपीठों में से एक शीतला माता मंदिर (कड़ा) वह स्थान माना जाता है जहां माता सती का दाहिना हाथ गिरा था। इसी पौराणिक मान्यता के कारण इसे एक महत्वपूर्ण शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है।

कड़ा को ऐतिहासिक रूप से इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?

कड़ा ऐतिहासिक रूप से एक प्रांत की राजधानी रहा है, जिससे इस क्षेत्र को धार्मिक महत्व के साथ-साथ ऐतिहासिक पहचान भी मिलती है। यही वजह है कि शीतला माता मंदिर सिर्फ एक शक्तिपीठ ही नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक धरोहर स्थल के रूप में भी देखा जाता है।

यहां की खासियत

  • 51 शक्तिपीठों में शामिल, जहां माता सती का दाहिना हाथ गिरा था
  • कड़ा प्रांत की ऐतिहासिक राजधानी में स्थित
  • धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल

[दर्शनसमय, पूजाविधि और भौगोलिक विवरण (जैसे नदी के निकट स्थिति) से जुड़ी specific जानकारी अभी उपलब्ध data में confirm नहीं है — यह verify करके ही जोड़ा जाए।]

आसपास के अन्य मंदिर

यह जानकारी लोक मान्यता/परंपरा पर आधारित है।

यह भी पढ़ें: शिवालिक की पहाड़ियों पर बसी ये देवियां क्यों हैं हरिद्वार यात्रा का अहम हिस्सा

FAQ

शीतला माता मंदिर (कड़ा) किस देवी को समर्पित है?

यह मंदिर माँ शीतला को समर्पित है, और यह 51 शक्तिपीठों में से एक है।

यह मंदिर शक्तिपीठ क्यों माना जाता है?

मान्यता है कि यह वह स्थान है जहां माता सती का दाहिना हाथ गिरा था।

शीतला माता मंदिर (कड़ा) तक कैसे पहुंचें?

सिराथू या प्रयागराज (60 किमी) से इस मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

लेखक

ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र लेखिका · 20 वर्ष का अनुभव

ज्योतिष, वैदिक कर्मकांड और स्वप्न-शास्त्र पर दो दशकों से लेखन कर रही हैं। दुर्गा सप्तशती, लाल किताब और नाड़ी ज्योतिष पर विशेष अध्ययन। पाठकों के प्रश्नों के आधार पर व्यावहारिक और शास्त्र-सम्मत मार्गदर्शन देती हैं।

  • योग्यता: ज्योतिष आचार्य, संस्कृत स्नातक
  • विशेषज्ञता: वैदिक ज्योतिष, लाल किताब, नाड़ी ज्योतिष, स्वप्न शास्त्र, व्रत एवं कर्मकांड