अंबाजी शक्तिपीठ: बिना मूर्ति वाला मंदिर और भादरवी पूनम मेला

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अंबाजी गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित शक्तिपीठ है, जहाँ मान्यता के अनुसार माता सती का हृदय गिरा था। इस मंदिर की सबसे विशिष्ट बात यह है कि यहाँ कोई मूर्ति नहीं है — गर्भगृह में श्री विसा यंत्र की पूजा की जाती है।

अंबाजी गुजरात के बनासकांठा जिले में, राजस्थान सीमा और माउंट आबू के निकट अरावली की पहाड़ियों में स्थित है। यह 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है।

शक्तिपीठ की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार दक्ष यज्ञ में अपमान से व्यथित होकर माता सती ने देह त्याग दी। शोकाकुल शिव उनका शरीर लेकर तांडव करते हुए भ्रमण करने लगे।

सृष्टि के संतुलन के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के अंग विभाजित किए। जहाँ-जहाँ अंग गिरे, वे शक्तिपीठ कहलाए। मान्यता है कि अंबाजी में हृदय गिरा था।

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मूर्ति नहीं, यंत्र

इस मंदिर की सबसे विशिष्ट बात यह है कि गर्भगृह में कोई प्रतिमा नहीं है। वहाँ श्री विसा यंत्र स्थापित है — एक त्रिकोणीय यंत्र, जिसकी पूजा की जाती है।

यंत्र को नग्न आँखों से देखना वर्जित माना जाता है और उसका छायाचित्र लेने की अनुमति नहीं है। दर्शन के समय यंत्र को वस्त्र और आभूषणों से इस प्रकार सज्जित किया जाता है कि वह देवी का स्वरूप प्रतीत हो।

यह परंपरा अंबाजी को अन्य शक्तिपीठों से अलग करती है, जहाँ प्रायः प्रतिमा पूजन होता है।

गब्बर पर्वत

मंदिर से लगभग तीन किलोमीटर दूर गब्बर पर्वत है, जिसे मूल स्थान माना जाता है। पर्वत पर देवी के चरण-चिह्न और एक अखंड ज्योत हैं।

ऊपर तक पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ और रोपवे दोनों उपलब्ध हैं। संध्या के समय यहाँ से दिखने वाला दृश्य दर्शनीय माना जाता है।

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भादरवी पूनम मेला

भाद्रपद पूर्णिमा पर यहाँ विशाल मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं। बड़ी संख्या में लोग पैदल यात्रा कर पहुँचते हैं — यह गुजरात के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है।

मार्ग में स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा सेवा शिविर लगाए जाते हैं, जहाँ भोजन और विश्राम की निःशुल्क व्यवस्था होती है।

कैसे पहुँचें

  • रेल मार्ग: आबू रोड स्टेशन, लगभग 20 किमी
  • वायु मार्ग: अहमदाबाद विमानतल, लगभग 180 किमी
  • सड़क मार्ग: अहमदाबाद और उदयपुर दोनों से बस सेवा उपलब्ध

यात्रा सुझाव

नवरात्रि और भादरवी पूनम पर अत्यधिक भीड़ रहती है। इन अवसरों पर दर्शन में कई घंटे लग सकते हैं।

अक्टूबर से मार्च मौसम की दृष्टि से अनुकूल है। ग्रीष्म ऋतु में अरावली क्षेत्र में तापमान अधिक रहता है।

दर्शन का समय और व्यवस्था

[संपादक: दर्शन समय, आरती, सेवा शुल्क और ऑनलाइन बुकिंग विवरण मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट से सत्यापित कर भरें।]

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंबाजी में माता का कौन सा अंग गिरा था?

मान्यता के अनुसार हृदय। यही कारण है कि इसे 51 शक्तिपीठों में विशेष स्थान प्राप्त है।

अंबाजी मंदिर में मूर्ति क्यों नहीं है?

यहाँ प्रतिमा के स्थान पर श्री विसा यंत्र की पूजा होती है। यंत्र को नग्न आँखों से देखना वर्जित माना जाता है और उसका छायाचित्र लेने की अनुमति नहीं है।

भादरवी पूनम मेला कब लगता है?

भाद्रपद पूर्णिमा पर। यह गुजरात के सबसे बड़े धार्मिक मेलों में गिना जाता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु पैदल यात्रा कर पहुँचते हैं।

गब्बर पर्वत क्यों महत्वपूर्ण है?

इसे मूल शक्तिपीठ स्थल माना जाता है। यहाँ देवी के चरण-चिह्न और अखंड ज्योत हैं। सीढ़ियाँ और रोपवे दोनों उपलब्ध हैं।

लेखक

ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र लेखिका · 20 वर्ष का अनुभव

ज्योतिष, वैदिक कर्मकांड और स्वप्न-शास्त्र पर दो दशकों से लेखन कर रही हैं। दुर्गा सप्तशती, लाल किताब और नाड़ी ज्योतिष पर विशेष अध्ययन। पाठकों के प्रश्नों के आधार पर व्यावहारिक और शास्त्र-सम्मत मार्गदर्शन देती हैं।

  • योग्यता: ज्योतिष आचार्य, संस्कृत स्नातक
  • विशेषज्ञता: वैदिक ज्योतिष, लाल किताब, नाड़ी ज्योतिष, स्वप्न शास्त्र, व्रत एवं कर्मकांड