नरक चतुर्दशी 2026 कब है? तारीख, यम दीपदान और अभ्यंग स्नान की पूरी विधि
दीपावली की रौशनी से पहले एक ऐसी रात आती है जब घर के हर कोने में दीये जलाए जाते हैं, और उद्देश्य यह होता है कि कोई अंधेरा घर में न टिके। इसे नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली कहा जाता है। ड्रिक पंचांग में इसे नवंबर 2026 के पहले हफ्ते में दिखाया गया है, लेकिन तारीख को लेकर अलग-अलग स्रोतों में थोड़ा अंतर दिखता है, इसलिए इसे अपने पंचांग से मिलाकर ही तय करें।
नरक चतुर्दशी 2026 की तारीख
नरक चतुर्दशी कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है, जो दीपावली (अमावस्या) से ठीक एक दिन पहले आती है। ड्रिक पंचांग के अनुसार 2026 में यह रविवार, 8 नवंबर को बताई गई है, जबकि कुछ स्रोत काली चौदस को 7 नवंबर के आसपास दिखाते हैं। व्यावहारिक रूप से इसका अर्थ यही है कि दीपावली से ठीक पहले की चतुर्दशी का दिन ही इस पर्व का समय है। पूजा का सटीक मुहूर्त आपके शहर के सूर्योदय और तिथि के समय पर निर्भर करता है।
नरक चतुर्दशी की कथा
कथा के अनुसार, नरकासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था, जिसने देवताओं और मनुष्यों को बहुत कष्ट दिया था। उसे भगवान श्रीकृष्ण ने इसी तिथि पर पराजित किया था। उसके वध के बाद लोगों ने राहत और खुशी में दीये जलाए। तभी से इस दिन को बुराई पर अच्छाई की विजय और अंधेरे से रौशनी की ओर जाने के प्रतीक के रूप में मनाया जाने लगा।
एक और लोककथा के अनुसार, इस रात यम देवता के नाम से दीप जलाने से परिवार पर अकाल मृत्यु का भय दूर रहता है। इसी कारण इसे यम दीपदान से भी जोड़ा जाता है।
अभ्यंग स्नान का महत्व
नरक चतुर्दशी की सुबह सूर्योदय से पहले तेल लगाकर स्नान करने की परंपरा है, जिसे अभ्यंग स्नान कहते हैं। माना जाता है कि इससे शरीर और मन दोनों की शुद्धि होती है और बुरी ऊर्जा दूर होती है। कई घरों में उबटन लगाने की भी परंपरा है। स्नान के बाद नए या साफ़ वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
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यम दीपदान की विधि
शाम के समय घर के मुख्य द्वार के बाहर, आँगन या छत पर मिट्टी का दीया जलाएँ। दीये में सरसों का तेल या घी डालें और उसमें दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखें, क्योंकि दक्षिण दिशा यम की मानी जाती है। कई परिवार यह दीया घर के सबसे बड़े सदस्य के हाथों से जलवाते हैं। दीप जलाते समय यम देवता से परिवार की रक्षा और दीर्घायु की प्रार्थना करें।
इस दिन कई लोग चौदह दीये जलाते हैं, जो चौदह यमों या चौदह लोकों के प्रतीक माने जाते हैं। यह स्थानीय परंपरा पर भी निर्भर करता है, इसलिए अपने घर के रिवाज़ का पालन करें।
किन बातों का ध्यान रखें
दीये जलाते समय सावधानी रखें, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के आसपास। आग से जुड़ी किसी भी असावधानी से बचें। पूजा के बाद परिवार के साथ मिलकर दीपावली की तैयारी करें, क्योंकि यह दिन त्योहार के उत्साह की शुरुआत का भी है।
निष्कर्ष
नरक चतुर्दशी 2026 हमें याद दिलाती है कि दीपावली की रौशनी सिर्फ़ घर सजाने के लिए नहीं, बल्कि मन और परिवार के भीतर के अंधेरे को मिटाने के लिए भी जलाई जाती है। तारीख की पुष्टि करके, स्नान और दीपदान की परंपरा निभाएँ और इस छोटी दीपावली को पूरे श्रद्धा भाव से मनाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नरक चतुर्दशी और काली चौदस में क्या अंतर है?
दोनों नाम अक्सर एक ही दिन के लिए इस्तेमाल होते हैं। नाम क्षेत्र और परंपरा के अनुसार बदलता है।
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2026 में नरक चतुर्दशी कब है?
ड्रिक पंचांग में इसे 8 नवंबर 2026 बताया गया है, जबकि कुछ स्रोत 7 नवंबर के आसपास दिखाते हैं। अपने पंचांग से पुष्टि करें।
अभ्यंग स्नान कब करें?
परंपरा के अनुसार सूर्योदय से पहले तेल लगाकर स्नान करना शुभ माना जाता है।
यम दीपदान कितने दीये जलाएँ?
कई परिवार चौदह दीये जलाते हैं, पर यह स्थानीय परंपरा पर निर्भर है।
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