पांडवों ने अज्ञातवास में बनवाया था ये शिवलिंग — कांवड़ यात्रा में है खास स्थान

पुराना शिव मंदिर (लोढ़ेश्वर महादेव) बाराबंकी (महादेवा) में स्थित एक स्वयंभू शिवलिंग वाला पौराणिक मंदिर है। मान्यता है कि इस शिवलिंग की स्थापना पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान की थी। यह मंदिर कांवड़ यात्रा के दौरान भी एक प्रमुख गंतव्य माना जाता है, जहां हर साल लाखों कांवड़िए दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

मंदिर की जानकारी

जानकारीविवरण
स्थानमहादेवा, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश
देवताभगवान शिव (स्वयंभू शिवलिंग)
श्रेणीपौराणिक महाभारत स्थल (Puranic Mahabharata Shrine)
कैसे पहुंचेंबाराबंकी जंक्शन (30 किमी)

लोढ़ेश्वर महादेव मंदिर का पांडवों से क्या संबंध है?

मान्यता है कि लोढ़ेश्वर महादेव मंदिर का स्वयंभू शिवलिंग पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान स्थापित किया था। यही पौराणिक और महाभारत-कालीन जुड़ाव इस मंदिर को एक विशेष ऐतिहासिक-धार्मिक महत्व प्रदान करता है।

यह मंदिर कांवड़ यात्रा में इतना खास क्यों है?

पुराना शिव मंदिर कांवड़ यात्रा के दौरान एक प्रमुख गंतव्य माना जाता है। हर साल सावन के महीने में बड़ी संख्या में कांवड़िए यहां गंगाजल चढ़ाने और दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जिससे इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है।

यहां की खासियत

  • मान्यता है कि स्वयंभू शिवलिंग की स्थापना पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान की थी
  • कांवड़ यात्रा के दौरान एक प्रमुख गंतव्य और पड़ाव
  • महाभारत काल से जुड़ी पौराणिक कथा वाला ऐतिहासिक शिव मंदिर

[दर्शनसमय, पूजाविधि और कांवड़ यात्रा के दौरान विशेष व्यवस्था से जुड़ी specific जानकारी अभी उपलब्ध data में नहीं है — यह section मंदिर ट्रस्ट की आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद जोड़ा जाए।]

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यह जानकारी लोक मान्यता/परंपरा पर आधारित है।

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FAQ

लोढ़ेश्वर महादेव मंदिर किसे समर्पित है?

यह मंदिर भगवान शिव को स्वयंभू शिवलिंग स्वरूप में समर्पित है।

इस मंदिर का पांडवों से क्या संबंध है?

मान्यता है कि इस शिवलिंग की स्थापना पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान की थी।

पुराना शिव मंदिर तक कैसे पहुंचें?

बाराबंकी जंक्शन से लगभग 30 किमी की दूरी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

लेखक

ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र लेखिका · 20 वर्ष का अनुभव

ज्योतिष, वैदिक कर्मकांड और स्वप्न-शास्त्र पर दो दशकों से लेखन कर रही हैं। दुर्गा सप्तशती, लाल किताब और नाड़ी ज्योतिष पर विशेष अध्ययन। पाठकों के प्रश्नों के आधार पर व्यावहारिक और शास्त्र-सम्मत मार्गदर्शन देती हैं।

  • योग्यता: ज्योतिष आचार्य, संस्कृत स्नातक
  • विशेषज्ञता: वैदिक ज्योतिष, लाल किताब, नाड़ी ज्योतिष, स्वप्न शास्त्र, व्रत एवं कर्मकांड