वृन्दावन का वो मंदिर जहां भक्ति का केंद्र सिर्फ राधा रानी हैं — जानें हित हरिवंश महाप्रभु की स्थापना की कहानी
राधा वल्लभ मंदिर वृन्दावन (मथुरा) में स्थित राधा-कृष्ण (राधावल्लभ स्वरूप) को समर्पित एक प्रमुख मंदिर है, जिसकी स्थापना हित हरिवंश महाप्रभु ने की थी। यह मंदिर राधा वल्लभ संप्रदाय का केंद्र है, जो विशेष रूप से राधा रानी की भक्ति पर बल देता है, और यही वजह है कि यह वैष्णव भक्ति परंपरा में एक अनोखा स्थान रखता है।
Table of Contents
मंदिर की जानकारी
| जानकारी | विवरण |
| स्थान | वृन्दावन, मथुरा, उत्तर प्रदेश |
| देवता | राधा कृष्ण (राधावल्लभ स्वरूप) |
| श्रेणी | राधा वल्लभ संप्रदाय (Radha Vallabh Sampradaya) |
| कैसे पहुंचें | मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन / आगरा एयरपोर्ट (AGR) |
राधा वल्लभ मंदिर की स्थापना किसने की थी?
राधा वल्लभ मंदिर की स्थापना हित हरिवंश महाप्रभु ने की थी, जो वैष्णव भक्ति परंपरा के एक महत्वपूर्ण संत माने जाते हैं। उन्हीं के नाम पर इस संप्रदाय का नाम राधा वल्लभ संप्रदाय पड़ा, जो आज भी वृन्दावन में सक्रिय भक्ति-धारा के रूप में जाना जाता है।

राधा वल्लभ संप्रदाय राधा रानी की भक्ति पर इतना बल क्यों देता है?
राधा वल्लभ संप्रदाय की सबसे खास बात यह है कि यह विशेष रूप से राधा रानी की भक्ति पर बल देता है। यह परंपरा राधा को कृष्ण-भक्ति के केंद्र में रखती है, और यही वजह है कि इस मंदिर की पूजा-पद्धति बाकी वैष्णव संप्रदायों से अलग और विशिष्ट मानी जाती है।

यहां की खासियत
- हित हरिवंश महाप्रभु द्वारा स्थापित, राधा वल्लभ संप्रदाय का केंद्र
- राधा रानी की भक्ति पर विशेष बल देने वाली अनोखी परंपरा
- वैष्णव भक्ति धारा में एक विशिष्ट और प्रतिष्ठित स्थान
[दर्शन–समय, पूजा–विधि और मंदिर की वास्तुकला/निर्माण–काल से जुड़ी specific जानकारी अभी उपलब्ध data में नहीं है — यह सब मंदिर ट्रस्ट की आधिकारिक जानकारी या verified historical source मिलने के बाद ही जोड़ा जाए।]
आस–पास के अन्य मंदिर
FAQ
यह जानकारी लोक मान्यता/परंपरा पर आधारित है।
यह भी पढ़ें: Mallikarjun Temple, Srisailam
राधा वल्लभ मंदिर किसे समर्पित है?
यह मंदिर राधा-कृष्ण को राधावल्लभ स्वरूप में समर्पित है।
राधा वल्लभ मंदिर की स्थापना किसने की थी?
इस मंदिर की स्थापना हित हरिवंश महाप्रभु ने की थी।
राधा वल्लभ मंदिर तक कैसे पहुंचें?
मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन या आगरा एयरपोर्ट (AGR) से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।





