सावन 2026 में क्या करें और क्या न करें: शास्त्रीय नियम
Short answer
सावन में शिव आराधना, जलाभिषेक, सोमवार व्रत और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। परंपरा में इस मास हरी पत्तेदार सब्जियों, बैंगन, दही और मांस-मदिरा के त्याग का निर्देश है। मांगलिक संस्कार चातुर्मास के कारण स्थगित रखे जाते हैं।
श्रावण मास सनातन परंपरा का सर्वाधिक व्रत-प्रधान काल है। इस मास से जुड़े नियम केवल धार्मिक नहीं — इनमें से अनेक का आधार वर्षा ऋतु का व्यावहारिक विवेक है।
क्या करें
- जलाभिषेक — प्रतिदिन या कम से कम सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पित करें
- सोमवार व्रत — सामर्थ्य के अनुसार पूर्ण उपवास या फलाहार
- रुद्राभिषेक — रुद्री पाठ के साथ अभिषेक, इस मास विशेष फलदायी माना गया
- महामृत्युंजय जप — आरोग्य और बाधा-निवारण के लिए
- दान — अन्न, वस्त्र, छाता और चप्पल का दान वर्षा ऋतु में विशेष पुण्यकारी
- शिव पुराण का पाठ — स्वाध्याय के लिए उपयुक्त काल
क्या न करें
आहार संबंधी
श्रावण में हरी पत्तेदार सब्जियों का त्याग बताया गया है। वर्षा ऋतु में इन पर कीट और सूक्ष्मजीव अधिक होते हैं और पाचन भी मंद रहता है — निषेध का व्यावहारिक आधार यही है।
बैंगन का त्याग भी परंपरा में है। दही और छाछ से बचने का निर्देश मिलता है, क्योंकि इस ऋतु में ये शीघ्र दूषित होते हैं।
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मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन पूरे मास वर्जित माने जाते हैं।
व्यवहार संबंधी
क्रोध, कटु वचन, किसी का अपमान और छल — इनसे बचने का निर्देश शास्त्रों में उपवास जितना ही महत्वपूर्ण बताया गया है। परंपरा में कहा गया है कि संयमित आचरण के बिना उपवास केवल भूख रह जाता है।
मांगलिक कार्य
चातुर्मास के कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए व्यापार का शुभारंभ इस मास नहीं किया जाता।
दिन में शयन का निषेध
श्रावण में दिन में सोने से बचने की परंपरा है। आयुर्वेद में भी वर्षा ऋतु में दिवास्वप्न को कफ बढ़ाने वाला बताया गया है — यह निषेध शास्त्र और आयुर्वेद दोनों में मिलता है।
एक व्यावहारिक बात
ये नियम सामर्थ्य के अनुसार पालन करने के लिए हैं। रोगी, गर्भवती स्त्रियाँ, बच्चे और वृद्धजन इनमें छूट ले सकते हैं। शास्त्र स्वयं कहता है कि शरीर को कष्ट देकर किया गया व्रत फलदायी नहीं होता।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सावन में हरी सब्जी क्यों नहीं खाते?
वर्षा ऋतु में पत्तेदार सब्जियों पर कीट और सूक्ष्मजीव अधिक होते हैं तथा पाचन मंद रहता है। परंपरा के पीछे यही व्यावहारिक कारण माना जाता है।
क्या सावन में दूध पी सकते हैं?
हाँ, दूध वर्जित नहीं है। दही और छाछ से बचने का निर्देश है क्योंकि वे इस ऋतु में शीघ्र दूषित होते हैं।
सावन में कौन सा मंत्र जपें?
ॐ नमः शिवाय सबसे प्रचलित है। आरोग्य और बाधा-निवारण के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप किया जाता है।
क्या सावन में बाल कटवा सकते हैं?
मुंडन संस्कार चातुर्मास में वर्जित है, किंतु सामान्य केश-कर्तन पर शास्त्रीय निषेध नहीं मिलता। यह क्षेत्रीय परंपरा पर निर्भर करता है।





