सावन शिवरात्रि 2026: चार प्रहर पूजा विधि और जलाभिषेक

Short answer

सावन शिवरात्रि श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस रात्रि को चार प्रहरों में विभाजित कर शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है — प्रत्येक प्रहर में अलग द्रव्य अर्पित होता है। जलाभिषेक और रात्रि जागरण इस पर्व का केंद्र हैं।

श्रावण मास शिव आराधना का काल माना जाता है, और इस मास की शिवरात्रि का महत्व महाशिवरात्रि के बाद सबसे अधिक माना गया है। कांवड़ यात्रा और जलाभिषेक की परंपरा इसी काल से जुड़ी है।

सावन शिवरात्रि का महत्व

शिव पुराण के अनुसार समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने इसी मास में ग्रहण किया था। विष के ताप को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया — यही परंपरा आज जलाभिषेक के रूप में निभाई जाती है।

यही कारण है कि श्रावण में शिवलिंग पर जल, दूध और शीतल द्रव्य चढ़ाने की विशेष परंपरा है।

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चार प्रहर की पूजा

शिवरात्रि की रात्रि को चार प्रहरों में बाँटा जाता है, प्रत्येक लगभग तीन घंटे का। परंपरा के अनुसार प्रत्येक प्रहर में भिन्न द्रव्य से अभिषेक होता है।

  • प्रथम प्रहर — जल से अभिषेक
  • द्वितीय प्रहर — दही से अभिषेक
  • तृतीय प्रहर — घृत से अभिषेक
  • चतुर्थ प्रहर — मधु से अभिषेक

प्रत्येक अभिषेक के बाद शुद्ध जल अर्पित किया जाता है और ॐ नमः शिवाय का जप किया जाता है।

जलाभिषेक की विधि

अभिषेक के लिए तांबे या पीतल के पात्र का प्रयोग किया जाता है। जल की धार पतली और अखंड रखी जाती है, और अभिषेक करते समय मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखा जाता है।

बेलपत्र शिव पूजा का प्रमुख अंग है — तीन पत्तों वाला, बिना कटा-फटा बेलपत्र चिकनी सतह नीचे रखकर अर्पित किया जाता है।

शिवलिंग पर क्या न चढ़ाएँ

परंपरा में कुछ वस्तुओं का निषेध बताया गया है: तुलसी दल, केतकी का पुष्प, हल्दी, नारियल का जल और शंख से जल। इनके पीछे पुराणों में अलग-अलग कथाएँ मिलती हैं।

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शुभ मुहूर्त — 11 अगस्त 2026

तिथि कृष्ण पक्ष — चतुर्दशी
नक्षत्र पुनर्वसु
सूर्योदय 05:48
सूर्यास्त 19:04
राहु काल 15:45 – 17:25 (इस समय शुभ कार्य टालें)
निशीथ काल 00:05 – 00:48 (महानिशीथ पूजा हेतु)

चार प्रहर पूजा का समय

प्रथम प्रहर (जल) 19:04 – 21:46
द्वितीय प्रहर (दही) 21:46 – 00:27
तृतीय प्रहर (घृत) 00:27 – 03:08
चतुर्थ प्रहर (मधु) 03:08 – 05:49

ये समय दिल्ली के लिए गणित हैं। अन्य नगरों में सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर रहेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सावन शिवरात्रि 2026 में कब है?

यह श्रावण कृष्ण चतुर्दशी को — 2026 में 11 अगस्त, मंगलवार को। तिथि का आरंभ-समाप्ति क्षेत्र के अनुसार बदलता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

क्या शिवलिंग पर तुलसी चढ़ा सकते हैं?

परंपरा के अनुसार शिवलिंग पर तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता। तुलसी भगवान विष्णु की पूजा में प्रयुक्त होती है।

चार प्रहर की पूजा अनिवार्य है?

नहीं। जो चारों प्रहर जागरण नहीं कर सकते, वे प्रथम प्रहर की पूजा कर सकते हैं। श्रद्धा और संयम को विधि से अधिक महत्व दिया गया है।

बेलपत्र कैसा होना चाहिए?

तीन पत्तों वाला, कटा-फटा या सूखा न हो। बेलपत्र की चिकनी सतह शिवलिंग की ओर रखकर अर्पित किया जाता है।

लेखक

ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र लेखिका · 20 वर्ष का अनुभव

ज्योतिष, वैदिक कर्मकांड और स्वप्न-शास्त्र पर दो दशकों से लेखन कर रही हैं। दुर्गा सप्तशती, लाल किताब और नाड़ी ज्योतिष पर विशेष अध्ययन। पाठकों के प्रश्नों के आधार पर व्यावहारिक और शास्त्र-सम्मत मार्गदर्शन देती हैं।

  • योग्यता: ज्योतिष आचार्य, संस्कृत स्नातक
  • विशेषज्ञता: वैदिक ज्योतिष, लाल किताब, नाड़ी ज्योतिष, स्वप्न शास्त्र, व्रत एवं कर्मकांड