पोंगल का आध्यात्मिक महत्व क्या है?

पोंगल दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु का प्रमुख त्योहार है। यह केवल एक फसल उत्सव नहीं है, बल्कि प्रकृति,…

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पोंगल दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु का प्रमुख त्योहार है। यह केवल एक फसल उत्सव नहीं है, बल्कि प्रकृति, ईश्वर, और मानव जीवन के गहरे आध्यात्मिक पहलुओं का प्रतीक है। पोंगल का नाम “पोंगल” शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ है “उबालना”। यह त्योहार न केवल नई फसल की खुशियां मनाने का अवसर है, बल्कि भगवान सूर्य, प्रकृति, और पशुओं के प्रति आभार प्रकट करने का माध्यम भी है। इस लेख में हम पोंगल के आध्यात्मिक महत्व और इसके उत्सव के पीछे छिपे गहरे संदेशों को समझेंगे।


पोंगल: परिचय

पोंगल चार दिनों तक मनाया जाने वाला त्योहार है, जो आमतौर पर जनवरी के मध्य में, मकर संक्रांति के आसपास पड़ता है। यह सौर कैलेंडर पर आधारित है और सूर्य देवता के उत्तरायण (उत्तर की ओर यात्रा) का स्वागत करता है। इसे “तमिल नववर्ष” की शुरुआत भी माना जाता है।