साल में सिर्फ एक दिन दिखती है सोने की मूर्ति — धनतेरस पर होता है ये चमत्कार

अन्नपूर्णा देवी मंदिर वाराणसी में स्थित अन्न और पोषण की देवी माता अन्नपूर्णा को समर्पित एक प्रमुख शक्ति स्थल है। यहां की सबसे खास बात यह है कि देवी की सोने की मूर्ति के दर्शन सिर्फ धनतेरस के दिन ही कराए जाते हैं, जिसके लिए हर साल हज़ारों श्रद्धालु बेसब्री से इंतज़ार करते हैं।

मंदिर की जानकारी

जानकारीविवरण
स्थानवाराणसी, उत्तर प्रदेश
देवतामाता अन्नपूर्णा (Goddess Annapurna)
श्रेणीदेवी / शक्ति स्थल (Devi / Shakti Shrine)
कैसे पहुंचेंवाराणसी जंक्शन रेलवे स्टेशन / वाराणसी एयरपोर्ट (VNS)

अन्नपूर्णा देवी मंदिर किसे समर्पित है?

अन्नपूर्णा देवी मंदिर माता अन्नपूर्णा को समर्पित है, जिन्हें अन्न, पोषण और समृद्धि की देवी माना जाता है। हिंदू मान्यता में उन्हें भोजन और जीवन-निर्वाह की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाता है, और यही वजह है कि यह मंदिर वाराणसी के प्रमुख शक्ति स्थलों में गिना जाता है।

सोने की मूर्ति के दर्शन धनतेरस पर ही क्यों होते हैं?

मंदिर में स्थापित देवी अन्नपूर्णा की सोने की मूर्ति के दर्शन विशेष रूप से धनतेरस के दिन कराए जाते हैं। इस दुर्लभ अवसर पर हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं ताकि वे इस स्वर्ण प्रतिमा के दर्शन कर सकें, जो साल के बाकी दिनों में आम दर्शन के लिए उपलब्ध नहीं होती।

यहां की खासियत

  • अन्न, पोषण और समृद्धि की देवी माता अन्नपूर्णा को समर्पित प्रमुख शक्ति स्थल
  • सोने की मूर्ति के दर्शन साल में सिर्फ धनतेरस के दिन ही होते हैं
  • वाराणसी के सबसे अनोखे और श्रद्धेय देवी मंदिरों में से एक

[दर्शनसमय और पूजाविधि से जुड़ी specific जानकारी अभी उपलब्ध data में नहीं है — यह section मंदिर ट्रस्ट की आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद जोड़ा जाए।]

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यह जानकारी लोक मान्यता/परंपरा पर आधारित है।

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FAQ

अन्नपूर्णा देवी मंदिर किसे समर्पित है?

यह मंदिर माता अन्नपूर्णा को समर्पित है, जिन्हें अन्न और पोषण की देवी माना जाता है।

अन्नपूर्णा देवी की सोने की मूर्ति के दर्शन कब होते हैं?

देवी की सोने की मूर्ति के दर्शन विशेष रूप से धनतेरस के दिन कराए जाते हैं।

अन्नपूर्णा देवी मंदिर तक कैसे पहुंचें?

वाराणसी जंक्शन रेलवे स्टेशन या वाराणसी एयरपोर्ट (VNS) से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

लेखक

ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र लेखिका · 20 वर्ष का अनुभव

ज्योतिष, वैदिक कर्मकांड और स्वप्न-शास्त्र पर दो दशकों से लेखन कर रही हैं। दुर्गा सप्तशती, लाल किताब और नाड़ी ज्योतिष पर विशेष अध्ययन। पाठकों के प्रश्नों के आधार पर व्यावहारिक और शास्त्र-सम्मत मार्गदर्शन देती हैं।

  • योग्यता: ज्योतिष आचार्य, संस्कृत स्नातक
  • विशेषज्ञता: वैदिक ज्योतिष, लाल किताब, नाड़ी ज्योतिष, स्वप्न शास्त्र, व्रत एवं कर्मकांड